योग फॉर बैड पोस्चर: भूमिका-
आज की जीवनशैली में बैड पोस्चर की समस्या
वर्तमान समय की व्यस्त व अनियमित जीवनशैली में, हमारी आदतें बहुत बदल चुकी हैं। मोबाइल और कंप्यूटर हमारी जीवनशैली की आवश्यकताएं बन गई हैं। सुबह से लेकर रात तक कार्य का दबाव, पढ़ाई का तनाव, अनियमित खानपान, घंटों स्क्रीन के सामने बैठकर कार्य करना, लगातार मोबाइल देखना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, नींद की कमी आदि कारणों से, हमारे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ये सभी विषम परिस्थितियां, हमारे शरीर की बनावट अर्थात पोस्चर को अप्राकृतिक रूप में या बैड पोस्चर में बदल देती हैं। इन सभी बैड पोस्चर को नजरअंदाज करना, हमारे लिए अत्यंत हानिकारक है। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए, ‘योग फॉर बैड पोस्चर’ की आवश्यकता पड़ती है।
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बैड पोस्चर क्या है?
पोस्चर का अर्थ है, शरीर का सही स्थिति में होना। जब हमारा शरीर अपनी प्राकृतिक और संतुलित अवस्था में होता है, तो उसे सही पोस्चर कहा जाता है। सही पोस्चर में, गर्दन और रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है, कंधे ढीले और सामान्य स्थिति में रहते हैं। इसके साथ ही शरीर के अन्य सभी अंग भी अपने सामान्य रूप में, अर्थात प्राकृतिक और संतुलित रूप में कार्य करते हैं। शरीर का अपनी सही स्थिति में होना अर्थात प्राकृतिक और संतुलित अवस्था में होना ही नियमित, प्राकृतिक और संतुलित जीवनशैली का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।
इसके विपरीत, बैड पोस्चर का अर्थ है, शरीर का सही स्थिति में न होना। जब हमारा शरीर अपनी प्राकृतिक और संतुलित अवस्था में नहीं, बल्कि गलत स्थिति में रहता है, तो उसे बैड पोस्चर कहा जाता है। बैड पोस्चर की शुरुआत प्रायः छोटी-छोटी गलतियों से ही होती है। जैसे- कुर्सी पर झुककर बैठना, मोबाइल देखते समय गर्दन नीचे झुका लेना, खड़े होते समय शरीर का वजन एक तरफ डाल देना या चलते समय कंधों को आगे की ओर झुका लेना। धीरे-धीरे ये सभी आदतें, बैड पोस्चर में बदल जाती हैं। बैड पोस्चर के शुरुआती संकेतों में गर्दन और कंधों में जकड़न, पीठ में दर्द, जल्दी थक जाना, उठने-बैठने के समय दर्द का अनुभव करना सभी सम्मिलित हैं।
आज के समय में, अनियमित और असंतुलित जीवनशैली के कारण, बैड पोस्चर की समस्याएं आम हो चुकी हैं। युवाओं में झुकी हुई कमर व गर्दन, आगे की ओर निकले हुए कंधे, लगातार दर्द और थकान की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। जबकि ऑफिस में कार्य करने वाले कर्मचारी, छात्र और मोबाइल का अधिक उपयोग करने वाले लोग विशेष रूप से प्रभावित हैं। इसे हम प्रायः अधिक हल्के में ले लेते हैं। इसलिए समय रहते बैड पोस्चर को सुधारना अत्यंत आवश्यक है। योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत, शुरुआत में किए गए छोटे प्रयासों के द्वारा ही, हम आगे चलकर बड़ी समस्याओं से बच सकते हैं और शरीर को स्वस्थ एवं संतुलित बना सकते हैं।
ऐसे में योग एक प्राकृतिक और सुरक्षित उपाय है। योग शरीर की मांसपेशियों को संतुलित करता है और समस्त शारीरिक और मानसिक क्रियाओ-प्रतिक्रियाओं को, प्राकृतिक और संतुलित रूप से संचालित करने में मदद करता है। इस लेख में आप जानेंगे कि ‘योग फॉर बैड पोस्चर’ कैसे कार्य करता है और किन-किन योगासनों से आप अपने पोस्चर को सुधार सकते हैं।
योग क्या है?
योग एक प्राचीन भारतीय पद्धति है, जो शरीर, मन और सांस के बीच संतुलन बनाने का कार्य करती है। सरल शब्दों में कहा जाए, तो योग हमें शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने का कौशल प्रदान करता है। योग केवल व्यायाम ही नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक और संतुलित जीवनशैली है, जो हमें आंतरिक रूप से मजबूत करती है। योग में आसन, प्राणायाम और ध्यान सम्मिलित होते हैं। आसन शरीर को लचीला और मजबूत बनाते हैं, प्राणायाम सांस को सही ढंग से नियंत्रित करता है और ध्यान, मन को शांत करता है। इन तीनों का संयुक्त अभ्यास ही शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत, नियमित योग करने से शरीर की मांसपेशियां प्राकृतिक रूप से मजबूत व संतुलित रहती हैं, तनाव कम हो जाता है और एकाग्रता बढ़ जाती है। योग का उद्देश्य, शरीर को उसकी प्राकृतिक और संतुलित अवस्था में बनाए रखना है। यही कारण है कि योग हर उम्र और हर वर्ग के लोगों के लिए अत्यंत लाभदायक और सुरक्षित माना जाता है।
योग का अर्थ एवं परिभाषा-
भारत में, योग का अस्तित्व, प्राचीन काल से ही माना जाता है। ‘योग’ शब्द संस्कृत की युज् धातु से बना है, जिसका अर्थ होता है जोड़ना या एकत्व स्थापित करना। योग का अर्थ है, शरीर, मन और आत्मा का आपस में संतुलन और सामंजस्य स्थापित करना। महर्षि पतंजलि ने योग को ‘चित्तवृत्ति निरोधः’ की संज्ञा दी है। अर्थात “योग वह अवस्था है जिसमें मन की चंचलता शांत हो जाती है।“ योग शारीरिक और मानसिक कार्यों को कुशलता और संतुलन के साथ संपन्न करने की एक पद्धति है।
योग के द्वारा, अपनी आंतरिक ऊर्जा को नियंत्रित कर सकते हैं, मन को संयमित रख सकते हैं और आत्म-साक्षात्कार की ओर अग्रसर हो सकते हैं । योग, शरीर को प्राकृतिक और संतुलित रूप से लचीला या स्वस्थ बनाने का साधन नहीं, बल्कि यह आत्म-नियंत्रण और जागरूकता का एक विकल्प भी है। आज संपूर्ण विश्व में, योग को स्वास्थ्य और फिटनेस के उपकरण के रूप में अपनाया जा रहा है। इसके साथ ही यह हमें विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करने में सहायता प्रदान करता है।
आधुनिक दृष्टिकोण में, योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत, योग एक ऐसी वैज्ञानिक जीवन-पद्धति है, जो नियमित योग के अभ्यास से, शरीर को स्वस्थ, मन को शांत और व्यक्ति को आत्मिक रूप से मजबूत करती है। इस तरह योग फॉर बैड पोस्चर, केवल व्यायाम नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन को बेहतर बनाने का सर्वश्रेष्ठ समाधान है।
ब्लॉग का उद्देश्य-
इस ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य पाठकों को योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत, बैड पोस्चर की समस्या के प्रति जागरूक करना और समझाना है, कि गलत पोस्चर धीरे-धीरे हमारे शरीर और जीवनशैली को यह किस तरह प्रभावित करता है। इसके अतिरिक्त इस ब्लॉग में योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत बैड पोस्चर के समाधान के लिए योग की भूमिका, बैड पोस्चर होने के प्रमुख कारण, बैड पोस्चर से उत्पन्न होने वाली समस्याएं, योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत बेस्ट योगासन, योग फॉर बैड पोस्चर के लिए सावधानियां आदि का वर्णन किया गया है।
इस ब्लॉग का उद्देश्य यह भी है, कि पाठक योग फॉर बैड पोस्चर के महत्व को आसानी से समझ सकें और यह जान सकें कि योग कैसे शरीर को उसकी प्राकृतिक स्थिति में वापस लाने में, यह किस तरह मदद करता है। इसमें बताए गए योगासन, प्राणायाम और रोजमर्रा की आदतें ऐसे लोगों के लिए हैं, जो बिना दवाइयों या भारी एक्सरसाइज के अपने पोस्चर को सुधारना चाहते हैं।
इसके साथ ही, यह ब्लॉग पाठकों को आज से ही छोटे-छोटे बदलाव लाने के लिए प्रेरित करता है, जिससे वे योग फॉर बैड पोस्चर की सहायता से बेहतर आत्मविश्वास और स्वस्थ व संतुलित जीवन की ओर कदम बढ़ा सकें।
योग और व्यायाम ई-बुक, कैसे प्राप्त करें?
यदि आपको योग और व्यायाम ई-बुक चाहिए तो आप वेबसाइट vijaybooks.store से प्राप्त कर सकते है और घर बैठे ही योग और व्यायाम का अभ्यास कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एक अन्य वेबसाइट yoga.ayush.gov.in है, जो भारत की एक सरकारी वेबसाइट है।
इस ब्लॉग के समान अन्य ब्लॉग भी उपलब्ध हैं।
योग फॉर बैड पोस्चर: बैड पोस्चर के समाधान के लिए योग की भूमिका-
बैड पोस्चर को ठीक करने के लिए, कई लोग जिम का सहारा लेते हैं, लेकिन यह हर किसी के लिए के रूप में संभव नहीं हो पाता है। योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत, बैड पोस्चर को ठीक करने के लिए योग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। बैड पोस्चर को सुधारने और शरीर को संतुलित करने में योग की भूमिका, धीरे-धीरे लेकिन स्थायी समाधान के रूप में होती है।
1. मांसपेशियों को संतुलित करने में-
योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत योगासन, शरीर की उन मांसपेशियों को संतुलित करके मजबूत करते हैं, जो बैड पोस्चर के कारण कमजोर, खिंची हुई या जकड़ी हुई होती हैं। अर्थात जो मांसपेशियां ज्यादा खिंची हुई होती हैं, उन्हें रिलैक्स करता है और जो कमजोर हैं उन्हें मजबूत बनाता है। इससे शरीर अपनी प्राकृतिक स्थिति में लौटने लगता है।
2. रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत करने में-
बैड पोस्चर का सबसे बड़ा प्रभाव, रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है। योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत योगासन, रीढ़ की हड्डी को धीरे-धीरे लचीला बनाते हैं और उसकी मजबूती को बढ़ा देते हैं। इससे कमर और पीठ का दर्द कम हो जाता है और शरीर प्राकृतिक रूप से सीधा हो जाता है।
3. स्थायी समाधान के लिए-
योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत योग का असर भले ही धीरे-धीरे दिखाई देता है, लेकिन यह स्थायी और सुरक्षित होता है। योग के नियमित अभ्यास से शरीर स्वयं को सही पोस्चर में रखने की आदत डाल लेता है। सबसे अच्छी बात यह है कि योग हर उम्र के लोगों के लिए सुरक्षित है। बच्चे, युवा और बुज़ुर्ग सभी अपनी क्षमता के अनुसार योग का नियमित अभ्यास करके, बैड पोस्चर को सुधार सकते हैं और एक स्वस्थ जीवनशैली की ओर बढ़ सकते हैं।
योग फॉर बैड पोस्चर: बैड पोस्चर होने के प्रमुख कारण-
आज के समय में बैड पोस्चर, किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई छोटी-छोटी गलत आदतों से बनता है। ये आदतें धीरे-धीरे हमारे शरीर की प्राकृतिक बनावट को बिगाड़ देती हैं और हमें इसका अनुभव तब होता है, जब दर्द या परेशानी शुरू हो जाती है।
1. टेक्नोलॉजी का अधिकतम उपयोग-
आजकल मोबाइल और लैपटॉप के बिना कार्य करना कठिन हो गया है। इनका अधिकतम उपयोग करना भी बैड पोस्चर को जन्म देता है। मोबाइल देखते समय हम प्रायः गर्दन को आगे की ओर झुका लेते हैं, जिसे ‘फॉरवर्ड हेड पोस्चर’ कहा जाता है। यही आदत गर्दन और कंधों पर अतिरिक्त दबाव डालती है। वहीं लैपटॉप पर कार्य करते समय लोग स्क्रीन के करीब झुककर बैठ जाते हैं। लगातार ऐसी स्थिति में बैठने से, कंधे आगे आ जाते हैं और कमर झुकने लगती है।
2. शारीरिक गतिविधियों की कमी-
शारीरिक गतिविधियों की कमी भी, बैड पोस्चर का बड़ा कारण है। जब हम नियमित रूप से योग या व्यायाम नहीं करते, तो मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। कमजोर मांसपेशियां शरीर को सही स्थिति में सहारा नहीं दे पातीं हैं। इसके अतिरिक्त, लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठना या खड़े रहना भी अत्यंत हानिकारक होता है। ऑफिस में घंटों कुर्सी पर बैठे रहना, शरीर को बैड पोस्चर की ओर ले जाता है।
3. बैठने और सोने की अनियमित आदतें-
कुर्सी या मेज पर गलत ढंग से बैठकर कार्य करना पोस्चर को बिगाड़ सकता है। अधिक मुलायम या बहुत सख्त गद्दे पर सोना भी रीढ़ की हड्डी के लिए अत्यंत हानिकारक होता है। बहुत ऊंचा या बहुत पतला तकिया गर्दन को बैड पोस्चर में रखता है, जिससे सुबह उठते ही दर्द का अनुभव होता है।
4. मानसिक तनाव-
मानसिक तनाव का प्रभाव केवल मस्तिष्क पर ही नहीं, बल्कि शरीर की स्थिति पर भी पड़ता है। अधिक तनाव में लोग अनजाने में कंधे सिकोड़ लेते हैं और शरीर भी झुका हुआ रहता है। लंबे समय तक ऐसा रहने से बैड पोस्चर की समस्या और बढ़ जाती है।
योग फॉर बैड पोस्चर: बैड पोस्चर से उत्पन्न होने वाली समस्याएं-
यदि बैड पोस्चर को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाता है, तो यह शरीर में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। शुरुआत में ये समस्याएं हल्की लगती हैं, लेकिन समय के साथ ये गंभीर रूप ले सकती हैं।
1. गर्दन और पीठ दर्द-
बैड पोस्चर के कारण, गर्दन और पीठ दर्द, की समस्या भी आम हो चुकी है। गलत ढंग से खड़े होने या बैठने के कारण, गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे लगातार दर्द होने लगता है। कई लोगों को सुबह उठते ही कमर या गर्दन में जकड़न का अनुभव होता है।
2. सिर-दर्द और थकान-
बैड पोस्चर के कारण, सिर-दर्द और थकान की समस्या भी आम हो चुकी है। गर्दन की मांसपेशियों पर तनाव बढ़ जाने से सिर में भारीपन रहता है और शरीर जल्दी थक जाता है।
3. सांस लेने में परेशानी-
बैड पोस्चर के कारण, जब शरीर झुकी हुई स्थिति में रहता है, तो फेफड़ों तक सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है। इससे सांस लेने में भी परेशानी होती है।
4. आत्मविश्वास में कमी-
गलत पोस्चर से आत्मविश्वास में कमी भी देखी जाती है। झुका हुआ शरीर, व्यक्ति को थका हुआ और कमजोर दिखाई देता है। लंबे समय तक इसका प्रभाव रीढ़ की हड्डी पर भी पड़ता है और शरीर की बनावट बदल जाती है।
5. दैनिक कार्यों पर प्रभाव-
गलत पोस्चर का प्रभाव, हमारे दैनिक कार्यों पर भी पड़ता है। जैसे- चलना, बैठना, कार्य करना और आराम करना सब मुश्किल लगने लगता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
योग फॉर बैड पोस्चर: बेस्ट योगासन-
योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत, बैड पोस्चर सुधारने के लिए ऐसे योगासन जरूरी होते हैं, जो रीढ़ की हड्डी को सीधा करें, मांसपेशियों को संतुलन में लाएं और शरीर को उसकी प्राकृतिक स्थिति में वापस ले जाएं। नीचे दिए गए योगासन सरल हैं और नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे असर दिखाते हैं।
1. ताड़ासन-

योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत ताड़ासन, योग का एक बहुत ही सरल लेकिन प्रभावशाली आसन है। यह आसन शरीर को सीधा और सही ढंग से खड़ा करने की आदत सिखाता है और बैड पोस्चर सुधारने में, महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका नियमित अभ्यास करने से शरीर में संतुलन और स्थिरता आती है।
विधि-
सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों को आपस में मिलाकर रखें। हाथों को शरीर के दोनों तरफ रखें और शरीर को ढीला छोड़ दें। अब गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और हथेलियों को आपस में मिला लें। इसके साथ ही धीरे-धीरे एड़ियों को ऊपर उठाएं और पूरे शरीर को ऊपर की ओर खींचने की कोशिश करें। कुछ सेकंड इसी स्थिति में रहें और सांस सामान्य रखें। इसके बाद फिर सांस छोड़ते हुए धीरे से एड़ियों और हाथों को नीचे लाएं। इसके बाद पुनः सामान्य अवस्था में आ जाएं।
लाभ-
ताड़ासन के नियमित अभ्यास से-
- रीढ़ की हड्डी को सीधा करता है।
- झुकी हुई गर्दन व कमर को सुधारता है।
- मांसपेशियां मजबूत होती हैं और संतुलन बेहतर होता है।
- सीधा खड़े होने और संतुलन में वृद्धि होती है, जिससे जिससे पोस्चर धीरे-धीरे सुधरने लगता है।
- आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।
2. भुजंगासन-

योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत भुजंगासन, योग का एक महत्वपूर्ण आसन है, जो रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाने में मदद करता है। यह आसन विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभदायक है, जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं या जिनका पोस्चर झुका हुआ हो।
विधि-
इसके लिए सबसे पहले पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। दोनों पैरों को सीधा रखें और पैर आपस में मिले हों। हथेलियों को कंधों के नीचे रखें और कोहनियों को शरीर से सटाकर रखें। अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए छाती को ऊपर की ओर उठाएं। ध्यान रखें कि नाभि जमीन से लगी रहे और गर्दन पर ज्यादा दबाव न पड़े। कुछ सेकंड इस अवस्था में रुकें, फिर सांस छोड़ते हुए धीरे से सामान्य स्थिति में आ जाएं।
लाभ-
भुजंगासन के नियमित अभ्यास से-
- झुकी हुई पीठ और रीढ़ की हड्डी सीधा हो जाता है।
- छाती और कंधे खुल जाते हैं, जिससे शरीर आगे की ओर झुकने से बच जाता है।
- पीठ दर्द को कम हो जाता है।
- पोस्चर सुधरने हो जाता है।
- शरीर में लचीलापन और ऊर्जा बढ़ जाती है।
3. मार्जारी-व्याघ्रासन-

योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत मार्जारी–व्याघ्रासन, जिसे कैट-काऊ पोज भी कहा जाता है, रीढ़ को लचीला बनाने और मजबूत करने वाला यह एक सौम्य योगासन है। यह आसन, शरीर में हड्डियों के जकड़न को कम करता है। यह मानसिक थकान दूर करने में भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
विधि-
इसके लिए सबसे पहले, हाथों और घुटनों के बल टेबलटॉप पोज में आएं। कंधों के नीचे हथेलियाँ और कूल्हों के नीचे घुटने रखें।
मार्जारी (Cat Pose)- सांस छोड़ते हुए पीठ को ऊपर उठाएं और सिर को नीचे झुकाएं।
व्याघ्र (Cow Pose)- सांस लेते हुए पीठ को नीचे की ओर ढीला करें और चेहरा ऊपर उठाएं।
इन दोनों मुद्राओं को सांस के साथ सामंजस्य स्थापित करके धीरे-धीरे 8–10 बार दोहराएं।
लाभ-
मार्जारी-व्याघ्रासन के नियमित अभ्यास से-
- यह आसन रीढ़ की हड्डी की जकड़न को कम करता है, जिससे शरीर तुरंत हल्का होने का अनुभव होता है।
- सांसों के साथ तालमेल बैठाने से मन शांत होता है और चिंता, तनाव तथा बेचैनी में राहत मिलती है।
- गर्दन व पीठ की जकड़न अकड़न को कम करता है।तंत्रिका तंत्र को संतुलित रखता है।
- लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने के प्रभाव को कम करता है।
4. अधोमुख श्वानासन-

योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत अधोमुख श्वानासन, एक ऐसा योगासन है, जो पूरे शरीर को एक साथ सक्रिय करता है। यह आसन बैड पोस्चर सुधारने के लिए अत्यंत लाभदायक माना जाता है। क्योंकि यह रीढ़ की हड्डी को लचीलापन और मजबूती प्रदान करता करता है और शरीर को सही संतुलन में लाता है।
विधि-
इसके लिए सबसे पहले घुटनों और हथेलियों के बल जमीन पर आएं। हथेलियां कंधों के ठीक नीचे और घुटने कूल्हों के नीचे रखें। अब सांस लेते हुए, कूल्हों को ऊपर की ओर उठाएं और शरीर को उल्टे ‘V’ के आकार में ले आएं। एड़ियों को जमीन की ओर दबाने की कोशिश करें, लेकिन यदि शुरुआत में एड़ियां जमीन तक न पहुंचें तो घबराएं नहीं। सिर को दोनों हाथों के बीच ढीला छोड़ दें और गर्दन पर जोर न डालें। कुछ सेकंड इस स्थिति में रहें और फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लौट आएं।
लाभ-
अधोमुख श्वानासन के नियमित अभ्यास से-
- पूरे शरीर में खिंचाव उत्पन्न हो जाता है, जिससे मांसपेशियां मजबूत हो जाती है।
- पीठ, कंधों व पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
- यह झुकी हुई कमर को सीधा करने में विशेष रूप से मदद करता है।
- शरीर हल्का हो जाता है और पोस्चर में स्पष्ट सुधार होता है।
- रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है।
5. सेतु बंधासन-

योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत सेतुबंधासन में, शरीर पुल के आकार में हो जाता है, इसलिए इसे सेतुबंधासन या ब्रिज पोज कहा जाता है। यह पीठ के लिए अत्यंत लाभकारी योगासन है जो रीढ़, छाती और जांघों को मजबूत करता है।
विधि-
इस आसन में सर्वप्रथम, शवासन में (पीठ के बल) लेट जाएं। हाथ सीधे रखें और हथेलियां ज़मीन की ओर हों। अपने दोनों घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर टिकाएं। दोनों पैर कूल्हों के समानांतर हों, एड़ियां नितंबों से सटकर रहें। हथेलियों का सहारा लेकर धीरे-धीरे कूल्हे को तब तक ऊपर उठाएं, जब तक कि शरीर गर्दन से घुटनों तक पुल के आकार में न आ जाए।
हाथों को ज़मीन पर फैला रहने दें या चाहें तो पीठ के नीचे हाथ जोड़कर ज़मीन में दबाएं। अपनी क्षमता अनुसार, इस स्थिति में रहें। अपना ध्यान, सांस और पेट पर रखें। तत्पश्चात वापस धीरे-धीरे कमर को ज़मीन पर टिकाएं और शवासन में विश्राम करें।
लाभ-
सेतुबंधासन में,
- लंबे समय तक बैठने के प्रभाव को कम करता है।
- रीढ़ की लचीलापन और मजबूती बढ़ जाती है।
- छाती और जांघों को मजबूत करता है।
- पीठ और कंधों की मजबूती बढ़ जाती है।
- फेफड़ों और श्वसन तंत्र में सुधार हो जाता है।
- पीठ दर्द और जकड़न को कम करता है।
सावधानियां-
यदि पीठ या गर्दन में गंभीर दर्द हो, उच्च रक्तचाप, माइग्रेन की समस्या में योग चिकित्सक से सलाह लें। गर्भवती महिलाएं प्रशिक्षित योग शिक्षक की निगरानी में ही यह आसन करें।
6. बालासन-

योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत, बालासन, योग का एक विश्रामदायक आसन है, जिसमें व्यक्ति अपने घुटनों के बल बैठकर, आगे की ओर झुकता है, हाथों को आगे फैलाकर, माथा जमीन पर रखता है। यह तनाव कम करने, पीठ और कंधों की जकड़न को दूर करने में मदद करता है।
विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम वज्रासन में, (घुटनों के बल) बैठकर, शरीर को आगे झुकाते हुए, माथा जमीन से लगाते हुए, अपने दोनों हाथ सामने या हथेलियां जमीन पर रख लें। अपनी आँखें बंद करके गहरी सांस लें। अपनी इस मुद्रा में 5 मिनट तक बैठें।
लाभ-
बालासन से-
- मस्तिष्क को शांति मिलती है।
- चिंता और थकान दूर होती है।
- रीढ़ की हड्डी सीधी और मजबूत होती है।
- पीठ और कंधों की जकड़न दूर होती है।
योग फॉर बैड पोस्चर: सावधानियां–
योग फॉर बैड पोस्चर के अंतर्गत, योग को सुरक्षित और प्रभावशाली बनाने के लिए, कुछ महत्वपूर्ण सावधानियों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
- सबसे पहले योग खाली पेट करना चाहिए। खाना खाने के बाद योगाभ्यास करने से शरीर में भारीपन रहता है और कई योगाभ्यास सही ढंग से नहीं हो पाता है।
- योगाभ्यास करते समय आरामदेह और ढीले कपड़े पहनना आवश्यक होता है। चुस्त कपड़े शरीर की गतिविधियों को रोकते हैं और सांस लेने में भी बाधा उत्पन्न करते हैं। आरामदेह कपड़े योगाभ्यास, ध्यान और संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं।
- यदि किसी को पहले से दर्द, गंभीर चोट या कोई आपरेशन हुआ है, तो योगाभ्यास शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। दर्द होने पर भी जबरदस्ती योगाभ्यास करना हानिकारक होता है।
- योग में सांस पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। सही ढंग से सांस लेने पर योगाभ्यास का प्रभाव बढ़ जाता है और शरीर आरामदायक स्थिति में रहता है। सांस रोकने या जल्दी-जल्दी सांस लेने से बचना चाहिए।
- शुरुआती लोगों के लिए अत्यंत आवश्यक है, कि वे आसान योगाभ्यास से शुरुआत करें। शरीर पर अधिक दबाव न डालें और नियमित अभ्यास के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ें।
योग फॉर बैड पोस्चर: निष्कर्ष-
आज की अनियमित जीवनशैली में, बैड पोस्चर एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन चुका है। योग फॉर बैड पोस्चर के माध्यम से यह संभव है, कि इसका समाधान करना भी कोई कठिन कार्य नहीं है। केवल आवश्यकता है, योग फॉर बैड पोस्चर को अपनी जीवनशैली में सम्मिलित करने की। इसके लिए प्रतिदिन योगाभ्यास की आदतों के माध्यम से, शरीर को फिर उसकी प्राकृतिक स्थिति में लाया जा सकता है।
पोस्चर सुधार के लिए बड़े बदलाव करने की आवश्यकता नहीं होती है। इसके लिए छोटे-छोटे बदलाव, जैसे- सही ढंग से बैठना, नियमित योगाभ्यास करना और सही ढंग से सांस लेना, समय के साथ बड़ा प्रभाव दिखाते हैं। यही छोटे-छोटे बदलाव, समय के साथ दर्द और थकान से राहत देती हैं।
इसके लिए आज से शुरुआत करना अत्यंत आवश्यक है। अतः सही समय का इंतजार करने के बजाय अभी एक छोटा कदम उठाएं। धीरे-धीरे आपका शरीर प्राकृतिक स्थिति में आना शुरू हो जाएगा।
एक प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और सीधा शरीर ही आत्मविश्वास भी बढ़ाता है। अतः सही पोस्चर के साथ, आप स्वयं के लिए अधिक ऊर्जावान और सकारात्मकता का अनुभव करेंगे।