योग फॉर पोजेस: भूमिका-
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वर्तमान समय की व्यस्त जीवनशैली में, सुबह से लेकर रात तक कार्य का दबाव, पढ़ाई का तनाव, गलत खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, नींद की कमी आदि के कारण, हमारे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर कार्य करना, अध्ययन करना, लगातार मोबाइल देखना, फास्ट फूड पर निर्भर रहना, नींद न आना जैसी आदतें, हमें शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक कमजोर करती जा रही हैं। ऐसे में, इन सभी समस्याओं का समाधान केवल ‘योग फॉर पोजेस’ के द्वारा ही संभव है। योग फॉर पोजेस हमारे शरीर को स्वस्थ रखने, मन को शांत करने और जीवन को संतुलित करने की एक प्राकृतिक पद्धति है।
आज की जीवनशैली में, असंतुलित भोजन, लगातार बढ़ता हुआ तनाव आदि कारणों से स्वास्थ्य की समस्याएं भी, दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। इस संसार में अधिकांश लोग अधिक मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, अवसाद और चिंता जैसी अनेक प्रकार की बीमारियों का तेजी से शिकार हो रहे हैं। इसी कारण स्वास्थ्य की समस्या, आज वैश्विक समस्या बन बन चुकी है। अतः अपने शरीर को स्वस्थ रखना, एक बड़ी चुनौती बनती जा रही रही है। इन विषम परिस्थितियों में ‘योग फॉर पोजेस’ शरीर को लचीला बनाते हैं, मांसपेशियों को मजबूत करते हैं, शरीर को पूर्ण रूप से स्वस्थ रखते हैं और मन को शांत रखते हैं।
योग क्या है?
योग, भारत की एक प्राचीनकालीन सांस्कृतिक विरासत और सर्वश्रेष्ठ जीवन पद्धति है। यह हजारों वर्षों से, हमारे स्वस्थ जीवन के लिए मार्गदर्शन करता चला आ रहा है। सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए, योग-युक्त जीवन-पद्धति का समर्थन और विकास, प्राचीन काल से ही भारतीय ऋषियों और आचार्यों के द्वारा ही किया गया है। योग केवल सांस लेने की प्रक्रिया अथवा शरीर को लचीला बनाने के लिए शारीरिक क्रियाओं का समूह ही नहीं, बल्कि मानसिक, आत्मिक और भावनात्मक संतुलन की एक महत्वपूर्ण पद्धति है।
इस पद्धति में, अपनी इच्छाएं, कामनाएं, विचार, शारीरिक-चेष्टाएं, आहार-विहार, विश्राम और श्रम आदि सभी सम्मिलित होते हैं। इसका उद्देश्य केवल शरीर को स्वस्थ रखना ही नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा बीच पूर्ण रूप से संतुलन भी स्थापित करना है। आजकल योग के नाम पर जो प्रचलन चल रहा है, उसमें केवल शारीरिक व्यायाम को ही योग मान लिया जाता है। इसलिए सम्पूर्ण जीवन को सफल और सुखी बनाने के प्रयास में, उन्हें उतनी सफलता नहीं मिल पाती, जितनी सफलता उन्हें मिलनी चाहिए।
अर्थ एवं परिभाषा-
‘योग’ शब्द ‘युज्’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है ‘संयोग’, ‘जुड़ना’ या ‘एक होना’। इसका वास्तविक अर्थ है शरीर, मन व चेतना का आपसी सामंजस्य अर्थात् आत्मा का परमात्मा से संयोग। इसका प्रयोजन आत्मा और परमात्मा के मिलन से है।
महर्षि पतंजलि को व्यापक रूप से ‘योग का जनक’ माना जाता है। उन्हें अपने प्रभावशाली ग्रंथ ‘योग सूत्र’ में, योग के विभिन्न पहलुओं को संकलित करने और व्यवस्थित करने का श्रेय दिया जाता है। महर्षि पतंजलि के अनुसार-
“योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः”, अर्थात् “योग मन की चंचल प्रवृत्तियों को नियंत्रित करने की कला है।“
उपर्युक्त से परिभाषा यह स्पष्ट है, कि योग का संबंध केवल शरीर से ही नहीं, बल्कि मन के अंतःकरण से भी है। योग एक संपूर्ण जीवन दर्शन है। इसमें शारीरिक अभ्यास (आसन), श्वास नियंत्रण (प्राणायाम), ध्यान (मेडिटेशन), नैतिक आचरण (यम-नियम) और आत्म-संयम जैसे कई तत्व सम्मिलित होते हैं। योग का उद्देश्य शरीर को मजबूत बनाने के साथ-साथ, मानसिक अशांति, तनाव, क्रोध, चिंता और नकारात्मक विचारों को दूर करके व्यक्ति को आंतरिक शांति प्रदान करना भी होता है।
योग फॉर पोजेस क्या है?
आज के समय में गलत लाइफस्टाइल, लंबे समय तक बैठकर कार्य करने की शैली, मोबाइल और कम्प्यूटर का अत्यधिक उपयोग, तनाव और अनियमित दिनचर्या हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है। योग फॉर पोजेस इन समस्याओं से धीरे-धीरे राहत राहत देने में मदद करता है। इससे शरीर में लचीलापन बढ़ता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और थकान कम होती है। साथ ही यह मन को शांत करता है और तनाव व चिंता को कम करने में सहायक होता है।
वर्तमान समय में, कार्य का लगातार बढ़ता दबाव एवं तनाव, असंतुलित भोजन (फास्ट फूड), लंबे समय तक बैठकर कार्य करने की शैली, मोबाइल और कम्प्यूटर का अत्यधिक उपयोग, ये सभी मिलकर हमारे शरीर और मन को अस्वस्थ बना देती हैं। इन सभी विषम परिस्थितियों में ‘योग फॉर पोजेस’ इन सभी समस्याओं का समाधान करने में मदद करता है। ‘योग फॉर पोजेस’ से शरीर में लचीलापन बढ़ता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और थकान कम होती है। इसके साथ ही यह तनाव व चिंता को कम करके, मन को शांत रखता है।
अर्थ एवं परिभाषा-
योग फॉर पोजेस का अर्थ है, शरीर को योग के विभिन्न पोजेस (आसनों) या अवस्थाओं में रखना और उस स्थिति में कुछ क्षण तक स्थिर रहना। इन पोजेस (आसनों) में सांस, शरीर की मुद्रा और मन की एकाग्रता पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाता है। यह केवल एक शारीरिक प्रक्रिया ही नहीं है, बल्कि शरीर मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया भी है।
“योग फॉर पोजेस, योग की वह अवस्था है, जिसमें व्यक्ति अपने शरीर को विशेष आसनों में रखकर सुव्यवस्थित ढंग से अभ्यास करता है, जिससे शरीर में लचीलापन और स्फूर्ति उत्पन्न हो, मांसपेशियां मजबूत हों और मन शांत रहे।“ ये सभी प्रक्रियाएं शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच को बढ़ाने में सहायक होते हैं। अतः योग फॉर पोजेस एक प्राकृतिक, अनियमित तथा सुरक्षित पद्धति है, जो शरीर को स्वस्थ, मन को शांत और जीवन को संतुलित बनाने में मदद करता है।
आज के समय में, योग फॉर पोजेस इसलिए आवश्यक हो गया है क्योंकि यह हर वर्ग और हर उम्र के लोगों के लिए अत्यधिकउपयुक्त है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी अपनी क्षमता के अनुसार, योग फॉर पोजेस का अभ्यास कर सकते हैं। इसका प्रभाव भले ही धीरे-धीरे दिखाई देता है, लेकिन यह लंबे समय तक सुरक्षित और स्थायी होता है। नियमित योग फॉर पोजेस के अभ्यास से, व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से शांत और जीवन में अधिक संतुलित होने का अनुभव करता है।
अतः योग फॉर पोजेस शरीर को स्वस्थ, मन को शांत और जीवन को संतुलित करने की, एक प्राकृतिक और सुरक्षित पद्धति है। यह जीवन जीने की कला है, जिसमें हमें स्वयं को समझने, स्वस्थ रहने और सकारात्मक सोच अपनाने में मदद करता है।
ब्लॉग का उद्देश्य-
इस ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य पाठकों को योग फॉर पोजेस के बारे में सरल, स्पष्ट और सम्पूर्ण जानकारी देना है। क्योंकि आज की व्यस्त जीवनशैली में लोग तनाव, अनियमित दिनचर्या, असंतुलित भोजन और शारीरिक समस्याओं से, अधिकांश लोग जूझ रहे हैं। ऐसे में यह ब्लॉग पाठकों को यह समझाने का प्रयास करता है, कि योग पोजेस किस तरह शरीर और मन को संतुलित रखने में मदद करते हैं।
इस ब्लॉग में-
- शुरुआती लोगों के लिए योग फॉर पोजेस।
- वजन घटाने के लिए योग फॉर पोजेस।
- मानसिक शांति के लिए योग फॉर पोजेस।
- महिलाओं के लिए योग फॉर पोजेस।
- बच्चों और छात्रों के लिए योग फॉर पोजेस।
- योग फॉर पोजेस के लाभ।
- योग फॉर पोजेस से संबंधित सावधानियां।
इन सभी का वर्णन किया गया है। इस ब्लॉग का उद्देश्य, योग को एक कठिन प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सरल, सुरक्षित और उपयोगी जीवनशैली के रूप में प्रस्तुत करना है, जिससे पाठक स्वस्थ शरीर और शांत मन की ओर कदम बढ़ा सकें।
योग और व्यायाम ई-बुक, कैसे प्राप्त करें?
यदि आपको योग और व्यायाम ई-बुक चाहिए तो आप वेबसाइट vijaybooks.store से प्राप्त कर सकते है और घर बैठे ही योग और व्यायाम का अभ्यास कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एक अन्य वेबसाइट yoga.ayush.gov.in है, जो भारत की एक सरकारी वेबसाइट है।
इस ब्लॉग के समान अन्य ब्लॉग भी उपलब्ध हैं।
शुरुआती लोगों के लिए योग फॉर पोजेस-
जो लोग योग की शुरुआत कर रहे हैं, उनके लिए आसान और सुरक्षित योग पोजेस चुनना बहुत जरूरी होता है। शुरुआती लोगों को ऐसे आसन करने चाहिए, जिन्हें करना सरल हो और जिनसे शरीर धीरे-धीरे योग के अभ्यास का आदी बन सके। सही तरीके से किए गए शुरुआती योग पोजेस शरीर को लचीला बनाते हैं और आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।
1. ताड़ासन-

ताड़ासन, योग फॉर पोजेस का एक सरल लेकिन बहुत महत्वपूर्ण आसन है। इसे खड़े होकर किया जाता है और यह शरीर की सही मुद्रा (पोस्चर) सुधारने में मदद करता है। ताड़ासन में शरीर को सीधा रखकर ऊपर की ओर खींचा जाता है, जिससे रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और संतुलन बेहतर बनता है। यह आसन योग की शुरुआत करने वालों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
ताड़ासन कैसे करें-
इसके लिए सर्वप्रथम, सावधान मुद्रा में सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों को आपस में मिला लें। अब गहरी सांस लेते हुए, दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और उंगलियों को आपस में मिला लें। एड़ियों को धीरे-धीरे ऊपर उठाकर पंजों के बल खड़े हो जाएं। शरीर को ऊपर की ओर खींचते हुए, कुछ सेकंड तक इसी स्थिति में रहें। फिर सांस छोड़ते हुए, धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं।
ताड़ासन के लाभ-
इसके नियमित अभ्यास से-
- आत्मविश्वास बढ़ता है।
- शरीर अधिक स्थिर और ऊर्जावान है।
- शरीर का संतुलन सुधरता है और पोस्चर सही होता है।
- रीढ़ की हड्डी, पैरों और घुटनों को मजबूत बनाता है।
2. वृक्षासन-

शरीर का संतुलन बनाने के लिए वृक्षासन, योग फॉर पोजेस का एक महत्वपूर्ण आसन है। इसमें शरीर को एक पैर पर स्थिर रखकर खड़ा होना होता है, ठीक वैसे ही जैसे एक पेड़ मजबूती से खड़ा रहता है। इसीलिए इसे वृक्षासन कहा जाता है। यह आसन, शरीर के साथ-साथ मन को भी स्थिर और शांत बनाने में मदद करता है।
वृक्षासन कैसे करें-
इसके लिए सर्वप्रथम, सावधान मुद्रा में सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों के बीच थोड़ा सा अंतर रखें। अब धीरे-धीरे एक पैर को मोड़कर उसके तलवे को दूसरे पैर की जांघ या पिंडली पर रखें। ध्यान रखें कि पैर घुटने पर न रखें। अब दोनों हाथों को जोड़कर छाती के सामने या सिर के ऊपर रखें। नजर एक जगह स्थिर रखें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें। कुछ समय तक इस स्थिति में रहें, फिर धीरे-धीरे वापस आ जाएं और दूसरा पैर बदलकर दोहराएं।
वृक्षासन के लाभ-
वृक्षासन के नियमित अभ्यास से-
- यह ध्यान और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक है।
- आत्मविश्वास बढ़ता है और मन शांत रहता है।
- शरीर का संतुलन बेहतर होता है और पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
यह आसन योग सीखने वालों के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है।
3. भुजंगासन-

भुजंगासन योग फॉर पोजेस का एक प्रभावशाली आसन है। इससे कोबरा पोज भी कहा जाता है। इस आसन में, शरीर का ऊपरी भाग ऊपर की ओर उठाया जाता है, जिससे शरीर की मुद्रा भुजंग या सांप जैसी दिखाई देती है। भुजंगासन, रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने और पीठ से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए जाना जाता है।
भुजंगासन कैसे करें-
इसके लिए सर्वप्रथम, पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। दोनों पैरों को सीधा रखें और पंजों को पीछे की ओर फैलाएं। हथेलियों को कंधों के पास जमीन पर रखें। अब गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे सिर, छाती और पेट के ऊपरी भाग को ऊपर उठाएं। ध्यान रखें, कि नाभि तक का भाग जमीन से लगा रहे। गर्दन और कंधों पर अधिक दबाव न डालें। कुछ क्षण इसी स्थिति में रहें और फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे नीचे आ जाएं।
भुजंगासन के लाभ-
भुजंगासन के नियमित अभ्यास से-
- रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाता है।
- शरीर सक्रिय और ऊर्जावान होता है।
- शरीर का संतुलन सुधरता है और पोस्चर सही होता है।
- पीठ दर्द और जकड़न को कम करता है।
4. बालासन-

बालासन, योग फॉर पोजेस का एक सरल और आराम देने वाला आसन है। इसे चाइल्ड पोज भी कहा जाता है। यह आसन शरीर और मन दोनों को गहरी शांति देने में मदद करता है। योग का अभ्यास करते समय, जब थकान या तनाव का अनुभव हो, तब बालासन करना अत्यंत लाभदायक होता है।
बालासन कैसे करें-
इसके लिए सर्वप्रथम, वज्रासन में बैठ जाएं या घुटनों के बल बैठकर एड़ियों पर कूल्हों को टिकाएं। अब धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें और माथे को जमीन से लगाएं। दोनों हाथों को आगे की ओर फैलाएं या शरीर के पास रखें। आंखें बंद रखें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें। इस स्थिति में कुछ समय तक आराम से रहें।
बालासन के लाभ-
बालासन के नियमित अभ्यास से-
- थकान और तनाव कम करने में सहायक होता है।
- पीठ, कंधों और गर्दन की मांसपेशियों को आराम देता है।
- मन को शांत करता है और बेचैनी को कम करता है।
यह योग फॉर पोजेस, ध्यान और योग के लिए उपयुक्त माना जाता है।
वजन घटाने के लिए योग फॉर पोजेस-
आज के समय में, वजन बढ़ना एक आम समस्या बन गई है, जिसका कारण गलत खानपान और कम शारीरिक गतिविधि है। ऐसे में, वजन घटाने के लिए योग फॉर पोजेस एक सुरक्षित और प्राकृतिक पद्धति माना जाता है। योग फॉर पोजेस, धीरे-धीरे शरीर की चर्बी पर प्रभाव डालते हैं और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। योग फॉर पोजेस के नियमित अभ्यास से, वजन को संतुलित रखना आसान हो जाता है।
1. सूर्य नमस्कार-

सूर्य नमस्कार, योग फॉर पोजेस का एक प्रभावशाली और संपूर्ण अभ्यास है। इसीलिए इसे योग फॉर पोजेस का पूरा पैकेज भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें शरीर के लगभग सभी अंग सक्रिय हो जाते हैं। सूर्य नमस्कार कई योग फॉर पोजेस का एक सुव्यवस्थित और क्रमबद्ध समूह है, जिसे सांस और संतुलन के साथ किया जाता है। यह शरीर को ऊर्जा देने और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है।
सूर्य नमस्कार कैसे करें-
सूर्य नमस्कार में कुल 12 चरण होते हैं। शुरुआत में सीधे खड़े होकर हाथ जोड़ें। फिर क्रम से आगे झुकना, पीछे की ओर झुकना, प्लैंक जैसी स्थिति, भुजंगासन और अंत में फिर खड़े होने तक के योग फॉर पोजेस किए जाते हैं। हर एक आसन के साथ सांस लेने और छोड़ने का सही सामंजस्य होता है। शुरुआत में, इसे धीरे-धीरे और अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए।
सूर्य नमस्कार के लाभ-
सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से-
- शरीर लचीला होता है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
- चर्बी धीरे-धीरे कम करने और वजन संतुलित रखने में मदद करता है।
- पाचन क्रिया बेहतर होता है, ऊर्जा बढ़ती है और मन शांत रहता है।
यह योग फॉर पोजेस, शरीर और मन दोनों के लिए अत्यंत लाभदायक माना जाता है।
2. त्रिकोणासन-

त्रिकोणासन, योग फॉर पोजेस का एक महत्वपूर्ण योगासन है। इस आसन में शरीर की आकृति त्रिकोण जैसी बन जाती है, इसलिए इसे त्रिकोणासन कहा जाता है। यह हाथों, पैरों, कमर और रीढ़ की हड्डी सभी के लिए उपयोगी योगासन है।
त्रिकोणासन कैसे करें-
इसके लिए सर्वप्रथम, सावधान मुद्रा में सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों के बीच लगभग 3-4 फीट की दूरी रखें। दोनों हाथों को कंधों के समानांतर फैला लें। अब दायें पैर की ओर झुकते हुए दायें हाथ को दायें पैर के टखने पर रखें। बायें हाथ को ऊपर की ओर सीधा रखें और ऊपर देखें। शरीर को एक सीधी रेखा में रखें। 15–30 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें। धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लौट आएं। अब यही प्रक्रिया बाईं ओर दोहराएं।
त्रिकोणासन के लाभ-
- कमर और रीढ़ की हड्डी मजबूत और लचीली बन जाती है।
- पेट की चर्बी कम होती है।
- पाचन क्रिया में सुधार होता है।
- जांघों, घुटनों और पैरों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।
- कंधे, छाती और गर्दन का दर्द कम होता है।
3. पाद-हस्तासन-

पाद-हस्तासन, योग फॉर पोजेस का एक सरल, लेकिन अत्यंत प्रभावशाली योगासन है, जिसमें व्यक्ति खड़े होकर आगे की ओर झुकता है और अपने हाथों से पैरों को स्पर्श करता है। यह आसन शरीर को लचीला बनाने, पाचन तंत्र को मजबूत करने और मानसिक तनाव को कम करने में बहुत सहायक होता है।
पाद-हस्तासन कैसे करें-
इसके लिए सर्वप्रथम, ताड़ासन की स्थिति में सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों को आपस में मिलाकर रखें। गहरी साँस लेते हुए दोनों हाथ ऊपर उठाएं। अब साँस छोड़ते हुए धीरे-धीरे कमर से आगे की ओर झुकें। हाथों से पैरों के पंजों या जमीन को छूने का प्रयास करें। सिर को घुटनों के पास ले जाने की कोशिश करें। 15–30 सेकंड तक इसी अवस्था में रहें। फिर धीरे-धीरे साँस लेते हुए वापस सीधी स्थिति में आ जाएं।
पाद-हस्तासन के लाभ-
पाद-हस्तासन के नियमित अभ्यास से-
- पेट की चर्बी कम होता है।
- पाचन तंत्र मजबूत होता है।
- रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है।
- तनाव, चिंता और थकान दूर होती है।
- सिरदर्द और अनिद्रा में लाभदायक।
मानसिक शांति के लिए योग फॉर पोजेस-
आज की व्यस्त जीवनशैली में, मानसिक शांति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और लगातार बढ़ते तनाव से मन तनावग्रस्त हो जाता है। ऐसे में योग फॉर पोजेस, मानसिक शांति पाने का एक सरल और प्राकृतिक पद्धति हैं। नियमित रूप से किए गए कुछ आसान योग फॉर पोजेस मन को शांत करते हैं और शरीर को गहराई से आराम देते हैं।
1. शवासन-

शवासन को विश्राम का आसन भी कहा जाता है। ‘शव’ का अर्थ होता है, मृत शरीर और इस आसन में शरीर पूरी तरह स्थिर रहता है, इसलिए इसे शवासन कहा जाता है। यह योग फॉर पोजेस के अभ्यास के अंत में, किया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण आसन माना जाता है। शवासन से शरीर और मन दोनों को पूरी तरह से गहरा विश्राम मिलता है।
शवासन कैसे करें-
इसके लिए सर्वप्रथम, पीठ के बल जमीन पर सीधा लेट जाएं। दोनों पैरों के बीच हल्का-सा अंतर रखें। दोनों हाथों को शरीर से थोड़ी दूरी पर रखें, हथेलियां ऊपर की ओर रखें। आँखें बंद करें और शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें। गहरी साँस लें और छोड़ें। पूरे शरीर को सिर से पैर तक शिथिल होने दें। 5 से 15 मिनट तक इसी अवस्था में रहें।
शवासन के लाभ-
शवासन के नियमित अभ्यास से-
- मानसिक थकान, तनाव और चिंता दूर होती है।
- शरीर को नई ऊर्जा मिलती है।
- रक्तचाप नियंत्रित रहता है।
- अनिद्रा की समस्या दूर होती है।
- मस्तिष्क शांत रहता है।
2. सुखासन-

सुखासन, योग फॉर पोजेस का सबसे सरल और आरामदायक आसन है। इसे ध्यान के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस आसन में शरीर सहज अवस्था में रहता है, जिससे मन को शांत करना और एकाग्र होना आसान हो जाता है। सुखासन का नियमित अभ्यास, मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है।
सुखासन कैसे करें-
इसके लिए सर्वप्रथम, एक साफ और शांत जगह पर, योग मैट बिछाकर बैठ जाएं। दोनों पैरों को मोड़कर आराम से एक-दूसरे के सामने रखें। रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और कंधों को ढीला छोड़ दें। दोनों हाथों को घुटनों पर रखें या ज्ञान मुद्रा में रखें। आंखें बंद करें और सामान्य रूप से गहरी सांस लें। कुछ मिनट तक इसी अवस्था में बैठकर सांस पर ध्यान दें।
सुखासन के लाभ-
सुखासन के नियमित अभ्यास से-
- मन शांत होता है और तनाव कम होता है।
- ध्यान और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है।
- मानसिक स्पष्टता बढ़ जाती है और बेचैनी कम होती है।
यह आसन योग और ध्यान की शुरुआत के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है।
3. सेतु बंधासन-

सेतु बंधासन, योग फॉर पोजेस का एक लाभदायक आसन है, जिसे ब्रिज पोज भी कहा जाता है। इस आसन में शरीर की मुद्रा पुल (सेतु) जैसी बनती है, इसलिए इसका नाम सेतु बंधासन रखा गया है। यह आसन शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ मन को शांत करने में भी मदद करता है।
सेतु बंधासन कैसे करें-
इसके लिए सर्वप्रथम, पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। दोनों घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर रखें। एड़ियां कूल्हों के पास हों। हाथों को शरीर के पास रखें, हथेलियां जमीन की ओर हों। अब गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे कमर और छाती को ऊपर उठाएं। सिर और कंधे जमीन पर ही टिके रहें। कुछ सेकंड इसी स्थिति में रहें और सांस सामान्य रखें। फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे शरीर को नीचे ले आएं।
सेतु बंधासन के लाभ-
सेतु बंधासन के नियमित अभ्यास से-
- मानसिक संतुलन बना रहता है।
- शरीर हल्का व ऊर्जावान रहता है।
- तनाव और थकान में राहत देता है।
- रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है और पीठ की मांसपेशियों को आराम देता है।
महिलाओं के लिए योग फॉर पोजेस-
महिलाओं की दैनिक जीवनशैली में, योग फॉर पोजेस का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। घर, परिवार और सभी कार्यों की जिम्मेदारियों के बीच महिलाएं प्रायः अपनी स्वास्थ्य स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती हैं। ऐसे में, प्रतिदिन थोड़ा समय निकालकर योग का अभ्यास करने से शरीर और मन दोनों को संतुलन मिलता है। योग फॉर पोजेस महिलाओं को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी शांत और आत्मविश्वासी बनाते हैं।
1. हार्मोन संतुलन में योग फॉर पोजेस-
योग फॉर पोजेस, हार्मोन संतुलन में भी लाभदायक होते हैं। नियमित योग फॉर पोजेस के अभ्यास से, शरीर का प्राकृतिक संतुलन बेहतर होता है, जिससे थकान, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग जैसी समस्याओं में कमी होती है। शवासन सुखासन जैसे योग फॉर पोजेस, शरीर को सक्रिय करते हैं और सम्पूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं।
2. कमर और पीठ दर्द में राहत-
महिलाओं में कमर और पीठ दर्द एक आम समस्या है, जिसका कारण लंबे समय तक बैठना, खड़े रहना या घरेलू काम हो सकते हैं। भुजंगासन, बालासन जैसे योग फॉर पोजेस रीढ़ की हड्डी को मजबूत करते हैं और मांसपेशियों को आराम देते हैं। नियमित अभ्यास से दर्द में धीरे-धीरे राहत मिलती है और शरीर अधिक लचीला बनता है।
3. मानसिक तनाव में योग फॉर पोजेस की भूमिका-
मानसिक तनाव को कम करने में भी योग फॉर पोजेस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। ध्यान और श्वास पर आधारित योग फॉर पोजेस मन को शांत करते हैं और नकारात्मक विचारों को कम करने में मदद करते हैं। इससे महिलाएं स्वयं को अधिक संतुलित और सकारात्मक महसूस करती हैं।
4. पीरियड्स और गर्भावस्था में योग फॉर पोजेस करते समय सावधानी-
पीरियड्स के समय और गर्भावस्था में, योग फॉर पोजेस करते समय विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है। इसके लिए कठिन या दबाव वाले पोजेस से बचना चाहिए और सदैव अपनी क्षमता के अनुसार ही योग करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह भी लेना चाहिए। सही ढंग से किया गया योग फॉर पोजेस, महिलाओं के जीवन को स्वस्थ और संतुलित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
बच्चों और छात्रों के लिए योग फॉर पोजेस-
आज के समय में, बच्चों और छात्रों के लिए योग पोजेस अत्यंत आवश्यक हो गए हैं। नियमित योग फॉर पोजेस करने से, बच्चों के शारीरिक विकास में मदद मिलती है। योग से शरीर मजबूत हो जाता है, लचीलापन बढ़ जाता है और सही पोस्चर विकसित होता है, जिससे बढ़ती उम्र में पीठ या गर्दन से संबंधित समस्याएं कम हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त योग बच्चों को एक्टिव और ऊर्जावान बनाए रखता है।
1. पढ़ाई में ध्यान बढ़ाने के लिए-
योग फॉर पोजेस, पढ़ाई में ध्यान बढ़ाने में भी सहायक होते हैं। सुखासन, ताड़ासन जैसे सरल पोजेस से एकाग्रता बढ़ती है और याददाश्त बेहतर होती है। जब मन शांत रहता है, तो पढ़ाई में मन लगना आसान हो जाता है और तनाव भी कम हो जाता है।
2. मोबाइल और स्क्रीन से होने के लिए-
आजकल बच्चों में मोबाइल और स्क्रीन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे आंखों, नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। योग फॉर पोजेस, बच्चों को स्क्रीन से दूरी बनाने और अपने शरीर से जुड़ने में मदद करते हैं। नियमित योग फॉर पोजेस से, बच्चों की आदतें धीरे-धीरे बेहतर होने लगती हैं।
3. योग फॉर पोजेस को खेल की तरह कैसे सीखने के लिए-
योग को बच्चों के लिए बोझ न बनाएं, बल्कि खेल की तरह सिखाएं। आसान पोजेस, मजेदार नाम और छोटी-छोटी गतिविधियों के साथ योग करवाएं। जब योग आनंद के साथ किया जाता है, तो बच्चे खुद इसमें रुचि लेने लगते हैं और यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है।
योग फॉर पोजेस के लाभ-
योग फॉर पोजेस के नियमित अभ्यास से, शरीर और मन दोनों पर सकारात्मक असर पड़ता है। दैनिक जीवन के सभी कार्य आसान हो जाते हैं। और थकान भी कम महसूस हो जाती है।
1. लचीलापन में वृद्धि-
योग फॉर पोजेस के नियमित अभ्यास से, शरीर में लचीलापन बढ़ जाता है, जिससे मांसपेशियां मजबूत हो जाती हैं और जोड़ों में जकड़न कम हो जाती है।
2. रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि-
इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। जब शरीर संतुलित रहता है और तनाव कम होता है, तो बीमारियों से लड़ने की क्षमता अपने-आप बढ़ जाती है।
3. नींद की गुणवत्ता में वृद्धि-
योग फॉर पोजेस का सीधा असर नींद पर भी पड़ता है। जो लोग योग फॉर पोजेस का नियमित अभ्यास करते हैं, उनके नींद की गुणवत्ता बढ़ जाती है। उन्हें जल्दी आती है और नींद गहरी व सुकून भरी होती है।
4. आत्मविश्वास में वृद्धि-
योग फॉर पोजेस के नियमित अभ्यास से, आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। जब शरीर स्वस्थ और मन शांत रहता है, तो व्यक्ति स्वयं को अधिक सक्षम और सकारात्मक होने का अनुभव करता है। इससे धीरे-धीरे सकारात्मक सोच में वृद्धि होने लगती है, जिससे चिंता और नकारात्मक विचार कम हो जाते हैं।
5. जीवनशैली में सुधार-
योग फॉर पोजेस के नियमित अभ्यास, जीवनशैली में भी सुधार लाते हैं। इससे व्यक्ति अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने लगता है, गलत आदतों से दूरी बना लेता है और योग फॉर पोजेस, समय के साथ एक अच्छी आदत भी बन जाती है, जो पूरे जीवन को संतुलित और बेहतर बनाने में मदद करती है। इसका प्रतिदिन नियमित अभ्यास करना स्वस्थ, खुशहाल और सक्रिय जीवन की ओर एक मजबूत कदम है।
योग फॉर पोजेस से संबंधित सावधानियां-
योग फॉर पोजेस का नियमित अभ्यास शरीर को स्वस्थ, मजबूत और ऊर्जावान बनाता है, लेकिन यदि इनका गलत ढंग से अभ्यास किया जाए, तो यह लाभ के स्थान पर हानिकारक भी हो सकता है। इसलिए कुछ सावधानियां अत्यंत आवश्यक है।
- शरीर तथा वस्त्र को स्वच्छ रखें। योगासन शुद्ध हवा में करें। यदि घर में करें तो स्थान, हवादार हो।
- आसन करते समय, किसी अन्य की उपस्थिति आवश्यक तथा उचित नही है। वातावरण शांत रहना चाहिए।
- भोजन नियत समय, पर प्रसन्न भाव से करना चाहिए। भोजन सादा तथा पौष्टिक हो, अधिक तेल, मिर्च, मशाला वाले न हों। शाक, सब्जी उबली हुई गुणकारी होती है।
- योग फॉर पोजेस के अभ्यास के बाद, आधे घंटे विश्राम करके दूध या फल ग्रहण करना चाहिए। चाय, कॉफी, नशीली चीज़े हानिकारक है।
- प्रातः काल में शौच के बाद, दाँत की सफाई करके ही योग फॉर पोजेस का अभ्यास करना चाहिए।
सभी प्रकार के योग फॉर पोजेस का अभ्यास, अपने-अपने स्थान पर अत्यंत उपयोगी हैं। यदि व्यक्ति सभी प्रकार के योगासन को संतुलित रूप से अपनी दिनचर्या में सम्मिलित करता है, तो वह शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकता है।
निष्कर्ष-
योग फॉर पोजेस, एक ऐसी सरल और प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो हमारे शरीर, मन और जीवनशैली को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। योग फॉर पोजेस का नियमित अभ्यास करने से शरीर में लचीलापन बढ़ जाता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है। यह मानसिक तनाव को कम करने और मन को शांत रखने में भी मदद करता है। यही कारण है, कि आज के तनाव से भरे जीवन में योग की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।
योग फॉर पोजेस की सबसे बड़ी विशेषता यह है, कि यह हर उम्र के लोगों के लिए उपयुक्त है। बच्चे अपनी एकाग्रता बढ़ाने के लिए योग कर सकते हैं, युवा वर्ग के लोग शरीर को फिट और एक्टिव रखने के लिए और बुजुर्ग लोग शरीर में संतुलन व लचीलापन बनाए रखने के लिए योग को अपनाकर लाभ उठा सकते हैं। योग फॉर पोजेस के अभ्यास को, अपनी क्षमता के अनुसार किया जा सकता है। इसमें किसी तरह का दबाव नहीं होता है।
योग का प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई देता है, लेकिन यह प्रभाव स्थायी और सुरक्षित होता है। इसके नियमित अभ्यास से, शरीर अंदर से मजबूत होता है और मन में सकारात्मक सोच विकसित होती है। यदि आप अपने शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखना चाहते हैं, तो आज से ही योग को अपने दैनिक जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाएं।
आज ही योग अपनाइए और संतुलित, खुशहाल जीवन की ओर एक नया कदम बढ़ाइए।