न्यूट्रिशन एंड वेलनेस: भूमिका-
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वर्तमान समय में काम का दबाव, अनियमित व गलत खान-पान, तनावपूर्ण जीवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी, नींद की कमी आदि सभी हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। इस संसार में, अधिकांश लोग अपनी व्यस्तता के कारण सही ढंग से, अपने स्वास्थ्य की देख-भाल नहीं कर पा रहे हैं। इसी कारण लोग तेजी से अनेक प्रकार की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में, इन सभी समस्याओं का समाधान, न्यूट्रिशन एंड वेलनेस के द्वारा ही संभव है। न्यूट्रिशन एंड वेलनेस, हमारे स्वस्थ जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने वाले एक ही सिक्के के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं।
आजकल गलत खान-पान का प्रभाव, धीरे-धीरे शरीर पर पड़ती जा रही हैं। अधिक तला-भुना, मीठा और प्रोसेस्ड फूड से मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। लगातार तनाव भी, शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे थकान, चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या बढ़ती जा रही हैं। इस तरह तनाव और गलत आहार एक साथ मिलकर, सम्पूर्ण इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देते हैं। इसके परिणामस्वरूप शरीर छोटी-छोटी बीमारियों से भी आसानी से प्रभावित होने लगता है। इसलिए सही न्यूट्रिशन एंड वेलनेस पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
आज के गतिशील जीवनशैली में, अनियमित रूप से बदलती हुई दिनचर्या, जैसे- लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना, फास्ट फूड पर निर्भरता आदि के कारण शरीर और मन, दोनों प्रभावित है। ऐसे में न्यूट्रिशन एंड वेलनेस ही एकमात्र विकल्प हैं, जो हमारे स्वस्थ और संतुलित जीवन के लिए, एक मजबूत नींव का कार्य करते हैं। लेकिन इस समय लोग न्यूट्रिशन एंड वेलनेस को केवल डाइट या वजन घटाने के लिए ही करते हैं, जबकि इनका क्षेत्र, इससे कहीं अधिक व्यापक है।
आज न्यूट्रिशन एंड वेलनेस, मानव स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण आवश्यकताओं के रूप में हैं। न्यूट्रिशन का अर्थ, शरीर को सही मात्रा में सही पोषक तत्व प्रदान करना है, जिससे वह ठीक से काम कर सके। जब हम संतुलित भोजन लेते हैं, तो शरीर को ऊर्जा मिल जाती है, इम्युनिटी मजबूत हो जाती है और दैनिक जीवन की थकान कम हो जाती है। वेलनेस, केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं है। इसमें मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्वास्थ्य भी सम्मिलित रहता है। एक व्यक्ति तभी पूरी तरह स्वस्थ माना जाता है, जब उसका शरीर फिट हो, मन शांत हो और जीवन में संतुलन बना रहे।
अतः आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में न्यूट्रिशन एंड वेलनेस को अपनाने के लिए बहुत बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं होती है। प्रतिदिन थोड़ा लेकिन संतुलित भोजन करना, पर्याप्त पानी पीना, नियमित शारीरिक गतिविधियां और सकारात्मक सोच, जैसे छोटे-छोटे कदम भी अत्यंत लाभदायक होते हैं। न्यूट्रिशन एंड वेलनेस को, यदि एक जीवनशैली की तरह अपनाया जाए, तो न केवल बीमारियों से बचा जा सकता है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर बनाया जा सकता है। यही स्वस्थ और आनंदपूर्ण जीवन की कुंजी है।
ब्लॉग का उद्देश्य-
इस ब्लॉग का उद्देश्य, सभी पाठकों को न्यूट्रिशन एंड वेलनेस के बारे में पूर्ण रूप से अवगत कराना है। इसके साथ ही इस ब्लॉग में न्यूट्रिशन का अर्थ एवं परिभाषा, वेलनेस का अर्थ एवं परिभाषा, प्रमुख लाभ, भारतीय डाइट और न्यूट्रिशन, भारतीय खानपान और पश्चिमी खानपान में तुलना, न्यूट्रिशन और मानसिक स्वास्थ्य में संबंध, स्वस्थ जीवन-शैली के लिए सुझाव, न्यूट्रिशन से संबंधित गलतियां, जो वेलनेस के लिए हानिकारक होती हैं, इन सभी का वर्णन किया गया है।
यदि अगर आप सच में अपने जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाना चाहते हैं, तो न्यूट्रिशन और वेलनेस को केवल एक ट्रेंड की तरह नहीं, बल्कि एक स्वस्थ जीवन शैली की तरह अपनाना होगा। यह ब्लॉग आपको यही समझाने के लिए है कि छोटे-छोटे बदलाव, कैसे लंबे समय में बड़े और सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं। आप न्यूट्रिशन और वेलनेस को अपनाएं और शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहें।
उपयोगी संसाधन-
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न्यूट्रिशन एंड वेलनेस: न्यूट्रिशन का अर्थ एवं परिभाषा-

न्यूट्रिशन एंड वेलनेस के अंतर्गत, न्यूट्रिशन का अर्थ है, शरीर की आवश्यकता के अनुसार, सभी प्रकार के पोषक तत्व प्रदान करना। इसमें सही समय पर और सही मात्रा में, भोजन करना अत्यंत आवश्यक है। न्यूट्रिशन में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट, विटामिन, खनिज लवण और जल पाए जाते हैं। ये सभी मिलकर शरीर को ऊर्जा, ताकत और रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं।
“न्यूट्रिशन वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से हमारा शरीर भोजन से ऊर्जा और आवश्यक तत्व प्राप्त करता है। यह ऊर्जा हमें चलने, सोचने, काम करने और खुद को स्वस्थ रखने में मदद करती है। जब शरीर को आवश्यकतानुसार पोषक तत्व मिलते हैं, तभी वह सही ढंग से काम कर पाता है।“
मैक्रोन्यूट्रिएंट्स की भूमिका-
मैक्रोन्यूट्रिएंट्स वे पोषक तत्व हैं, जिनकी शरीर को अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट सम्मिलित होते है। कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देते हैं, प्रोटीन मांसपेशियों की मरम्मत और निर्माण में मदद करता है, जबकि फैट हार्मोन संतुलन और दिमाग के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होता है। इन तीनों का संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का महत्व-
माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, जैसे- विटामिन और मिनरल्स, कम मात्रा में होते हैं, लेकिन इनकी भूमिका बहुत बड़ी होती है। ये इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं, हड्डियों को स्वस्थ रखते हैं और शरीर के अंदर होने वाली कई आवश्यक क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
हम प्रतिदिन भोजन में अलग-अलग प्रकार के पके हुए तथा कच्चे खाद्य पदार्थ लेते है। जैसे- रोटी, सब्जी, दाल, चावल आदि पके हुए के रूप में तथा टमाटर गाजर मूली खीरा आदि सभी कच्चे ही खा लेते है। इन सभी खाद्य पदार्थों में, शरीर का पोषण करने वाले अनेक प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते है, जो हमारे शरीर को स्वस्थ तथा निरोग रखते हैं। इन्हीं तत्वों को न्यूट्रिशन कहा जाता है। न्यूट्रिशन का अर्थ मात्र भोजन तक ही नहीं सीमित है। शरीर को आवश्यक सभी पोषक तत्वों को संतुलित मात्रा में देना ही सही पोषण है। यह निम्नलिखित पोषक तत्वों पर आधारित होता है।
1- कार्बोहाइड्रेट-

कार्बोहाइड्रेट,कार्बनिक पदार्थ है। यह शरीर में ऊर्जा उत्पन्न करने का मुख्य स्रोत है। जैसे- ज्वार, बाजरा, मक्का, चावल, आलू, फल, चुकंदर ,खजूर आदि।
2- प्रोटीन-

प्रोटीन एक जटिल कार्बनिक पदार्थ है। जैसे- चना, मटर ,मूंग, मसूर, अरहर, मक्का, सोयाबीन आदि प्रोटीन के मुख्य स्रोत हैं। प्रोटीन त्वचा, रक्त, मांसपेशियों तथा हड्डियों के विकास के लिए आवश्यक होते हैं। यह शरीर के घावों को भरने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।
3- वसा-

इसे शक्तिदायक ईंधन भी कहा जाता है। मूंगफली, सरसों, सोयाबीन, नारियल आदि के तेल, वसा के पादप स्रोत हैं। अंडे, मांस, मछली, दुग्ध-उत्पाद आदि वसा के जंतु स्रोत हैं। इसकी कमी से शरीर की कार्य-क्षमता काम हो जाती है इसकी अधिकता से मधुमेह, ह्रदय-रोग आदि हो जाते हैं।
4- विटामिन्स-

विटामिन तथा खनिज लवण, हमें हरी-हरी सब्जियों तथा फलों से प्राप्त होते हैं। ये अनेक रोगों से हमारी रक्षा करते हैं। विटामिन जटिल कार्बनिक यौगिक होते हैं। शरीर में प्रत्येक अंग को आवश्यकतानुसार अलग अलग विटामिन की आवश्यकता पड़ती है। भोजन में विटामिन के सभी स्रोतों को सम्मिलित करके हम स्वस्थ रह सकते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं।
वसा में घुलनशील विटामिन- विटामिन A, D, E तथा K
जल में घुलनशील विटामिन- विटामिन B तथा C
5- खनिज लवण-

शरीर को सक्रिय बनाने के लिए अल्प मात्रा में ही सही, परन्तु अनिवार्य रूप से खनिज लवणों का भोजन में होना अति आवश्यक होता है। जैसे- आयरन की कमी से एनीमिया होता है, जिसका स्रोत- मांस, अंडा, अनाज, हरी सब्जियां है। कैल्शियम की कमी से दाँत तथा हड्डियों का कमजोर होना जिसका स्रोत- दूध, पनीर, अनाज, हरी सब्जियां है।
6- जल-

शरीर की हर कोशिका को सक्रिय बनाए रखने के लिए, पर्याप्त पानी आवश्यक है। प्रतिदिन 8–10 गिलास पानी पीना चाहिए।
न्यूट्रिशन एंड वेलनेस: वेलनेस का अर्थ एवं परिभाषा-

न्यूट्रिशन एंड वेलनेस के अंतर्गत, वेलनेस का अर्थ है, शरीर, मन और भावनाओं के बीच संतुलन बनाकर एक बेहतर और संतुष्ट जीवन जीना। वेलनेस, एक समग्र अवधारणा है। इसमें शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्वास्थ्य भी सम्मिलित होता है। जब शरीर स्वस्थ हो, मन शांत हो और जीवन में संतुलन बना रहे, तभी हम सही मायनों में वेलनेस की स्थिति में होते हैं।वेलनेस का अर्थ, केवल बीमार न होने तक ही नहीं सीमित है, बल्कि सक्रिय और सकारात्मक जीवन भी व्यतीत करना होता है।
“वेलनेस एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति अपनी जीवनशैली, सोच और आदतों को बेहतर बनाने पर ध्यान देता है। यह केवल किसी लक्ष्य तक पहुंचने की बात नहीं, बल्कि प्रतिदिन स्वयं को बेहतर अनुभव कराने की एक यात्रा है।“
वेलनेस का शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संबंध-
शारीरिक वेलनेस का संबंध यानी शरीर की देखभाल, सही भोजन, नियमित व्यायाम और आराम से है। मानसिक वेलनेस का संबंध सोच, फोकस और तनाव प्रबंधन से है। वहीं भावनात्मक वेलनेस हमें अपनी भावनाओं को समझने और संभालने की क्षमता देता है। ये तीनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। अगर इनमें से एक भी असंतुलित हो जाए, तो उसका असर पूरे स्वास्थ्य पर पड़ता है।
यह शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का संतुलन है। इसमें नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद लेना, तनाव से मुक्त होना, सकारात्मक सोच और सामाजिक संबंधों का भी योगदान होता है। जब हम शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होते हैं, तभी हम अपने व्यक्तिगत और व्यवसायिक जीवन में सफल हो सकते हैं। इसलिए हम अपने आहार, जीवन-शैली और मानसिक स्थिति पर ध्यान दें और न्यूट्रिशन एंड वेलनेस को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। यह न केवल हमारे स्वास्थ्य को बेहतर बना देता है, बल्कि संपूर्ण जीवन को भी संतुलित और सुखद बना देता है।
अच्छी नींद, सकारात्मकता और सक्रिय जीवनशैली-
अच्छी नींद, शारीरिक और मानसिक संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है। सकारात्मकता मानसिक क्षमता में वृद्धि करती है और सक्रिय जीवनशैली, शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। ये तीनों मिलकर वेलनेस की मजबूत नींव तैयार करते हैं।
वेलनेस: लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट-
वेलनेस के लिए आज अपनाई गई अच्छी आदतें, जैसे- प्रतिदिन थोड़ी दूर पैदल चलना, समय पर सोना और योग व व्यायाम के लिए कुछ मिनट निकालना, लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। और भविष्य में थकान और गंभीर बीमारियों से रक्षा भी करती हैं। इसलिए वेलनेस, एक लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट की तरह है।
अतः वेलनेस का अभिप्राय है, शरीर का ऊर्जा से परिपूर्ण होना, मन शांत होना और अपने दैनिक जीवन के सभी कार्य, बिना थकान के करना। इसके लिए सही भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधियां, पर्याप्त नींद और सकारात्मकता, ये सभी मिलकर कार्य करते हैं।
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न्यूट्रिशन एंड वेलनेस: प्रमुख लाभ-
न्यूट्रिशन एंड वेलनेस के अंतर्गत सही न्यूट्रिशन, केवल पेट भरने या वजन नियंत्रित करने तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह पूरे शरीर और जीवनशैली को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। जब शरीर को उसकी जरूरत के अनुसार पोषक तत्व मिलते हैं, तो इसका असर अंदर से लेकर बाहर तक साफ दिखाई देता है।
1. इम्युनिटी मजबूत होना-

न्यूट्रिशन एंड वेलनेस के अंतर्गत, सही न्यूट्रिशन से इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है। विटामिन C, विटामिन D, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को संक्रमण और बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं। संतुलित आहार लेने वाले लोग प्रायः बीमार नहीं पड़ते और उनकी रिकवरी भी बेहतर होती है।
2. एनर्जी लेवल में सुधार होना-

यदि अगर दिनभर थकान का अनुभव होता है, तो इसका कारण गलत खान-पान हो सकता है। न्यूट्रिशन एंड वेलनेस के अंतर्गत सही न्यूट्रिशन, उचित मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और हेल्दी फैट शरीर को स्थिर ऊर्जा प्रदान करते हैं। इससे दिनभर एक्टिव रहने में मदद मिलती है और काम करने की क्षमता बढ़ती है।
3. वजन संतुलन और मेटाबॉलिज्म-

न्यूट्रिशन एंड वेलनेस के अंतर्गत सही न्यूट्रिशन, मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है। जब शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता है, तो वह फैट को सही ढंग से उपयोग करता है और वजन अपने आप संतुलित रहने लगता है। बार-बार भूख लगना और ओवरईटिंग की समस्या भी कम होती है।
4. स्किन, बाल और पाचन तंत्र मजबूत होना-

न्यूट्रिशन एंड वेलनेस के अंतर्गत सही न्यूट्रिशन, स्किन और बालों में प्राकृतिक चमक उत्पन्न करता नेचुरल ग्लो देता है और पाचन तंत्र को मजबूत रखता है। फाइबर, विटामिन और मिनरल्स का सही सेवन कब्ज, एसिडिटी और स्किन प्रॉब्लम्स को कम करता है।
5. जीवनशैली से संबंधित बीमारियों से बचाव-
जीवनशैली से संबंधित बीमारियों, जैसे- डायबिटीज, हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर का मुख्य कारण असंतुलित भोजन है। न्यूट्रिशन एंड वेलनेस के अंतर्गत सही न्यूट्रिशन, इन बीमारियों को काफी हद तक कम कर सकता है।
6. उम्र के साथ स्वस्थ रहने में मदद-
उम्र बढ़ने के साथ-साथ, शरीर को अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है। न्यूट्रिशन एंड वेलनेस के अंतर्गत, संतुलित पोषण हड्डियों, मांसपेशियों और मानसिक स्वास्थ्य को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखता है।
न्यूट्रिशन एंड वेलनेस: भारतीय डाइट और न्यूट्रिशन-
भारतीय डाइट को लेकर कई तरह की धारणाएं और भ्रम प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे बहुत भारी भोजन मानते हैं, तो कुछ इसे वजन बढ़ाने वाला कहते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि भारतीय डाइट अपने आप में पोषण का एक समृद्ध स्रोत है, यदि इसे सही ढंग और संतुलन के साथ अपनाया जाए।
भारतीय डाइट में पोषण शक्ति-
भारतीय डाइट में दाल, सब्ज़ी, अनाज, दही और मसालों का संतुलित मेल होता है। यह संयोजन शरीर को प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स प्रदान करता है। हल्दी, अदरक, लहसुन और जीरा जैसे मसाले भी एंटी-इंफ्लेमेटरी और पाचन में सहायक होते हैं।
देसी घी, दाल, चावल, रोटी और सब्जियों का अद्भुत संयोजन-
देसी घी, हार्मोन संतुलन और पाचन के लिए फायदेमंद होता है। इसी तरह दाल और चावल, ऊर्जा और प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। सही मात्रा में रोटी और चावल का सेवन, शरीर को संतुलन प्रदान करता है।
भारतीय क्षेत्रीय डाइट का महत्व-
भारत की हर क्षेत्रीय डाइट स्थानीय जलवायु और जीवनशैली के अनुसार बनी है। यही कारण है कि भारतीय डाइट, शरीर को प्राकृतिक रूप से अनुकूलता प्रदान करती है।
पारंपरिक भारतीय डाइट का वेलनेस से संबंध-
पारंपरिक भारतीय डाइट, वेलनेस के आधुनिक सिद्धांतों से अधिक मेल खाता है, जैसे- संतुलन, विविधता और प्राकृतिक पोषण।
न्यूट्रिशन एंड वेलनेस: भारतीय खानपान और पश्चिमी खानपान में तुलना-
न्यूट्रिशन एंड वेलनेस के सन्दर्भ में, भारतीय खानपान और पश्चिमी खानपान में तुलना इस प्रकार है।
विषय
मुख्य खाद्य
वसा स्रोत
पाचन
रोग/जोखिम
भारतीय आहार
दाल-चावल, रोटी-सब्ज़ी
घी, नारियल तेल
मसाले और फाइबर से भरपूर
कम होता है, यदि संतुलित हो तो
पश्चिमी आहार
ब्रेड, पास्ता
बटर, मेयो
कम फाइबर
अधिक होता है, यदि प्रोसेस्ड हो तो
न्यूट्रिशन एंड वेलनेस: न्यूट्रिशन और मानसिक स्वास्थ्य में संबंध-
न्यूट्रिशन एंड वेलनेस के अंतर्गत, कई शोधों में यह प्रमाणित हो चुका है कि सही न्यूट्रिशन का भी मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। सही न्यूट्रिशन न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मस्तिष्क की क्षमता में भी वृद्धि करता है।
1. मनःस्थिति और एकाग्रता पर प्रभाव-
न्यूट्रिशन का गहरा प्रभाव हमारे मनःस्थिति और एकाग्रता पर पड़ता है। वहीं संतुलित भोजन और प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ जैसे दही, किमची, ये हमारे हमारी आंत स्वास्थ्य सुधारते हैं, जिससे मानसिक स्थिति, एकाग्रता और स्मरण-शक्ति बेहतर होती है।
2. स्ट्रेस, एंग्जायटी और गलत खान-पान-
लगातार स्ट्रेस और एंग्जायटी की स्थिति में लोग अक्सर जंक, फूड कम्फर्ट फूड या ओवरईटिंग की ओर झुक जाते हैं। यह आदत कुछ समय के लिए आराम देती है, लेकिन सामान्य रूप से, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं। ऐसे समय में स्वस्थ विकल्प जैसे डार्क चॉकलेट, फल, हर्बल चाय का चयन करना चाहिए।
3. ओमेगा-3, मैग्नीशियम और विटामिन-बी की भूमिका-
ओमेगा-3 फैटी एसिड, ये हमारे हमारी अवसाद और चिंता को कम करते हैं। स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी होता है। यह मूड को संतुलित रखने में मदद करता है। मैग्नीशियम तनाव को कम करने और नींद सुधारने में सहायक होता है, जबकि विटामिन-बी (विटामिन B12 और फोलेट), हमारी मानसिक स्पष्टता और याददाश्त को सुधार करने में भूमिका निभाता है।
4. संतुलित जीवन शैली के लिए मानसिक शांति-
सही न्यूट्रिशन, नियमित नींद, फिजिकल एक्टिविटी और तनाव प्रबंधन, ये सभी मिलकर मानसिक शांति का आधार बनते हैं। संतुलित लाइफस्टाइल अपनाकर मेंटल हेल्थ को लंबे समय तक बेहतर रखा जा सकता है।
न्यूट्रिशन और वेलनेस: स्वस्थ जीवन-शैली के लिए सुझाव-
न्यूट्रिशन एंड वेलनेस के सन्दर्भ में, स्वस्थ जीवन-शैली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बात यह है, कि कोई भी बदलाव रातोंरात प्रभाव नहीं दिखाता। विशेषज्ञ हमेशा ऐसे पद्धतियों की सलाह देते हैं, जिन्हें लंबे समय तक अपनाया जा सके और जो शरीर के साथ सामंजस्य स्थापित करके काम करे। स्वस्थ जीवनशैली के लिए सुझाव इस प्रकार है।
- सुबह का नाश्ता कभी नहीं छोड़ना चाहिए। यह दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन होता है। एक प्रोटीन युक्त नाश्ता (जैसे- मूंग दाल चिल्ला, ओट्स आदि) मेटाबोलिज़्म को तेज करता है।
- प्रतिदिन घर का बना खाना खाना चाहिए। घर का बना ताजा भोजन हमेशा स्वास्थ्यवर्धक होता है। बाजार से खरीदे हुए स्नैक्स की जगह फल, नट्स और बीजों का सेवन करें।
- हर 2-3 घंटे में हल्का भोजन लेना चाहिए। यह मेटाबोलिज़्म को सक्रिय रखता है और अधिक खाने से रोकता है। मौसम के अनुसार भोजन करें। जैसे- गर्मियों में जलधारी फल (जैसे- तरबूज, खीरा,…..) और सर्दियों में उष्ण खाद्य पदार्थ (जैसे- गुड़, तिल, मूंगफली,…..)।
- प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए। प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट पैदल चलना, योग या अन्य व्यायाम करना आवश्यक है।
- प्रतिदिन नींद पर ध्यान देना चाहिए। रात्रि में भोजन हल्का और सोने से कम से कम 2 घंटे पहले करें। 6 घंटे की गहरी नींद से, शरीर को भरपूर आराम मिलता है।
- सप्ताह में मानसिक विश्राम के लिए, एक दिन ‘डिजिटल डिटॉक्स’ करें।
- एक डायरी में प्रतिदिन का आहार और मूड नोट करें। इस प्रकार न्यूट्रिशन एंड वेलनेस के अंतर्गत, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध स्पष्ट होगा।
न्यूट्रिशन से संबंधित गलतियां, जो वेलनेस के लिए हानिकारक होती हैं
इस संसार में, अधिकांश लोग कई बार न्यूट्रिशन से संबंधित कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो वेलनेस के लिए अत्यंत हानिकारक होती हैं। सही जानकारी का अभाव और जल्दी परिणाम पाने की इच्छा, इन गलतियों का सबसे बड़ा कारण होता है।
1. ट्रेंडिंग डाइट्स को आंख बंद करके फॉलो करना-
आजकल सोशल मीडिया पर नई-नई डाइट्स तेजी से ट्रेंड करती हैं। अधिकांश लोग बिना सोचे-समझे इन्हें अपनाने लगते हैं, जबकि हर शरीर की आवश्यकता अलग-अलग होती है। यह डाइट, किसी अन्य शरीर के लिए अत्यंत लाभदायक और आपके लिए हानिकारक भी हो सकती है।
2. सप्लीमेंट्स पर आवश्यकता से अधिक निर्भरता-
सप्लीमेंट्स को अक्सर पौष्टिक भोजन का विकल्प मान लिया जाता है। जबकि सच यह है कि ये केवल पूरक होते हैं, विकल्प नहीं। आवश्यकता से अधिक सप्लीमेंट्स लेने पर, शरीर का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है।
3. भूखे रहकर वजन घटाने की कोशिश-
भूखे रहना या बहुत कम भोजन करना, वजन घटाने की सही पद्धति नहीं है। इससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और शरीर आवश्यक पोषक तत्वों से वंचित रह जाता है। लंबे समय में इसका प्रभाव, थकान और कमजोरी के रूप में सामने आता है।
4. शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करना-
भूख, थकान या पाचन समस्या जैसे संकेत, शरीर की आवश्यकताओं की ओर इशारा करते हैं। इन्हें नजरअंदाज करना, आपके लिए हानिकारक भी हो सकता है। शरीर की बात सुनना, स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
न्यूट्रिशन और वेलनेस: निष्कर्ष-
न्यूट्रिशन एंड वेलनेस एक स्थायी ट्रेंड् है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, सकारात्मक सोच और प्राकृतिक जीवन-शैली, स्वस्थ जीवन की कुंजी है। पोषण केवल शरीर का विषय नहीं, यह मन, आत्मा और सामाजिक संबंधों को भी प्रभावित करता है। अतः उत्तम स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाएंऔर न्यूट्रिशन एंड वेलनेस को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएं। यह आपके जीवन की गुणवत्ता में बड़ा बदलाव ला सकता है।
न्यूट्रिशन और वेलनेस किसी एक दिन या कुछ हफ्तों का लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह जीवनभर चलने वाली एक यात्रा है। इस पूरी चर्चा का सार यही है कि जब शरीर को सही पोषण मिलता है और जीवनशैली में संतुलन होता है, तो उसका असर केवल स्वास्थ्य पर नहीं, बल्कि सोच, ऊर्जा और जीवन की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। सही न्यूट्रिशन शरीर को मजबूती देता है, जबकि वेलनेस मन को शांति और स्थिरता प्रदान करता है।
छोटे-छोटे कदम ही, बड़ी स्वास्थ्य यात्रा की शुरुआत होते हैं। जैसे- प्रतिदिन भोजन करना, समय पर सोना, थोड़ी शारीरिक गतिविधियां आदि ये सभी मिलकर आने वाले समय के लिए अत्यंत लाभदायक होते हैं। जरूरी नहीं कि आप सब कुछ एक साथ बदलें, बस आज एक सही फैसला लेना ही काफी है।
आज से शुरुआत करने का सबसे अच्छा समय अभी है। न्यूट्रिशन और वेलनेस को बोझ के रूप न में देखें। अपने शरीर की जरूरतों को समझें, उसकी बात सुनें और उस पर ध्यान दें।
अतः सही पोषण को अपनाएं और स्वस्थ जीवन का आनंद उठाएं।