ग्लूट एक्सरसाइज: भूमिका-
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वर्तमान समय की व्यस्त जीवनशैली में, हमारी आदतें बहुत बदल चुकी हैं। मोबाइल और कंप्यूटर हमारी जीवनशैली की आवश्यकताएं बन गई हैं। सुबह से लेकर रात तक कार्य का दबाव, पढ़ाई का तनाव, घंटों स्क्रीन के सामने बैठकर कार्य करना, लगातार मोबाइल देखना, शारीरिक गतिविधियों का न होना, इन सभी कारणों से हमारे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऑफिस में प्रायः लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहने से, ग्लूट मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं, जिसका प्रभाव कमर दर्द, घुटनों की समस्या और बैड पोस्चर के रूप में दिखाई देता है। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए ग्लूट एक्सरसाइज की आवश्यकता पड़ती है।
ग्लूट मसल्स-
ग्लूट मसल्स, हमारे शरीर की नितंबों में विद्यमान मांसपेशियाँ होती हैं। इन मसल्स की गणना, शरीर की सबसे बड़ी और सशक्त मांसपेशियों में होती है। ग्लूट मसल्स की आवश्यकता हमारे दैनिक जीवन की सभी गतिविधियों में पड़ती है। जैसे- चलना, दौड़ना, सीढ़ियों पर चढ़ना, बैठना और खड़े होना। ग्लूट मसल्स का प्रमुख कार्य शरीर को सहारा देना, संतुलन बनाए रखना और प्रतिदिन की गतिविधियों को आसान बनाना होता है। अतः मजबूत ग्लूट मसल्स के बिना, शरीर का संतुलन बनाए रखना अत्यंत कठिन हो जाता है।
ग्लूट मसल्स के प्रकार-
हमारी ग्लूट मसल्स, तीन प्रमुख मांसपेशियों से मिलकर बनी होती हैं। ये तीनों मसल्स मिलकर हमारे शरीर को ताकत, संतुलन और सभी गतिविधियों को आसान बनाने का कार्य करती हैं। यदि इनमें से कोई एक भी मसल कमजोर हो जाए, तो चलने-फिरने, बैठने-उठने और शरीर के संतुलन एवं पोस्चर पर प्रभाव पड़ जाता है। ग्लूट मसल्स के सभी प्रकार को नीचे समझाया गया है।
1. ग्लूटियस मैक्सिमस-
ग्लूटियस मैक्सिमस मसल्स, शरीर की सबसे बड़ी और मजबूत मसल होती है। यह नितंबों के मुख्य भाग का निर्माण करती है और शरीर को सीधा रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब हम खड़े होते हैं, सीढ़ियों पर चढ़ते हैं, दौड़ते हैं या वजन उठाते हैं, तब ग्लूटियस मैक्सिमस इन गतिविधियों में सबसे अधिक कार्य करती है। शरीर की सम्पूर्ण क्षमता में इसका बड़ा योगदान होता है। मजबूत ग्लूटियस मैक्सिमस से, शरीर के निचले भाग की क्षमता बढ़ जाती है और कमर पर दबाव भी कम हो जाता है। यही मसल शरीर के आकार को भी आकर्षक बनाती है। स्क्वैट, हिप थ्रस्ट और डेडलिफ्ट जैसी एक्सरसाइज, इसे मजबूत करने के लिए लाभदायक होती है।
2. ग्लूटियस मीडियस-
ग्लूटियस मीडियस मसल, ग्लूटियस मैक्सिमस के ऊपर और साइड में होती है। यह मसल, शरीर का संतुलन और स्थिरता बनाए रखने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब हम एक पैर पर खड़े होते हैं या चलते हैं, तो यही मसल हमें गिरने से बचाती है। इस तरह शरीर का संतुलन बनाने, चलने, दौड़ने, सीढ़ियों पर चढ़ने में, ग्लूटियस मीडियस का महत्वपूर्ण योगदान होता है। यदि यह मसल कमजोर हो जाए, तो घुटनों में दर्द, कूल्हे की समस्या और लड़खड़ाते हुए चलने की आदत बन सकती है। साइड लेग रेज, लंज और स्टेप-अप जैसी एक्सरसाइज इसे मजबूत करने के लिए अत्यंत लाभदायक होती है।
3. ग्लूटियस मिनिमस-
ग्लूटियस मिनिमस, इन तीनों में सबसे छोटी मसल होती है, लेकिन इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह मसल कूल्हे की सहज और नियंत्रित गतिविधियों में मदद करती है। विशेष रूप से पैर को साइड में उठाने और घुमाने के समय यह सक्रिय रहती है। ग्लूटियस मिनिमस, चोट से बचाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह कूल्हों के जोड़ों को मजबूत करती है और अचानक उत्पन्न हुई मांसपेशियों में खिंचाव के खतरे को कम करती है। मजबूत ग्लूटियस मिनिमस हिप और लोअर बैक की समस्याओं से बचाता है।
अतः इन तीनों ग्लूट मसल्स को संतुलित तरीके से मजबूत या प्रशिक्षित करना ही एक मजबूत, स्थिर और स्वस्थ शरीर की कुंजी है।
मजबूत ग्लूट मसल्स के लाभ-
मजबूत ग्लूट मसल्स, शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक होती हैं। जब ग्लूट्स मसल्स मजबूत होती हैं, तो शरीर के कई भागों में इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देता है। मजबूत ग्लूट्स के प्रमुख लाभ नीचे आसान भाषा में बताए गए हैं।
1. पीठ दर्द में कमी-
कमजोर ग्लूट मसल्स के कारण ही शरीर का अधिक दबाव कमर पर पड़ता है, जिससे पीठ दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है। मजबूत ग्लूट्स ही कमर को सही ढंग से मजबूत करती हैं और रीढ़ की हड्डी पर पड़ने वाले दबाव को कम करती हैं। इससे लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने पर भी पीठ दर्द भी कम हो जाता है।
2. बॉडी पोस्चर में सुधार-
मजबूत ग्लूट मसल्स, शरीर को स्वस्थ, सीधा और संतुलित रखने में मदद करती हैं। ये कंधों, कमर और कूल्हे को सही स्थिति में रखती हैं, जिससे झुककर चलने या बैठने की आदत धीरे-धीरे ठीक होने लगती है। इससे बॉडी पोस्चर में सुधार होने लगता है।
3. खेलों में श्रेष्ठ प्रदर्शन-
दौड़ना, कूदना, फुटबॉल, क्रिकेट या जिम वर्कआउट, इन सभी में ग्लूट मसल्स का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान होता है। मजबूत ग्लूट मसल्स से स्पीड, पावर और स्टैमिना बढ़ जाता है, जिससे खेल प्रदर्शन बेहतर होता है और थकान भी कम हो जाती है।
4. फैट बर्न में मदद-
ग्लूट मसल्स बड़ी मांसपेशियाँ होती हैं। इसलिए इन्हें ट्रेन करने से अधिक मात्रा में कैलोरी बर्न होती है। इससे शरीर का फैट तेजी से कम होने के साथ-साथ मेटाबॉलिज़्म भी बेहतर हो जाता है।
5. घुटनों और कूल्हे की सुरक्षा-
मजबूत ग्लूट मसल्स घुटनों और हिप्स पर पड़ने वाले दबाव को कम करती हैं, जिससे चोट लगने का खतरा भी कम हो जाता है।
ग्लूट एक्सरसाइज-
आज की की व्यस्त जीवनशैली में ऑफिस में कई घंटे स्क्रीन के सामने बैठकर कार्य करने, लगातार अध्ययन करने, मोबाइल देखने, अर्थात लम्बे समय तक बैठने वाली लाइफस्टाइल में ग्लूट मसल्स कमजोर हो जाती हैं। अतः ग्लूट एक्सरसाइज, शरीर की ग्लूट मसल्स को सक्रिय रखने और मजबूत करने के लिए किए जाते हैं। नियमित और सही तरीके से की गई ग्लूट एक्सरसाइज न सिर्फ शरीर की फिटनेस बढ़ाती हैं, बल्कि आत्मविश्वास और एनर्जी लेवल को भी बेहतर बनाती हैं। ग्लूट एक्सरसाइज में प्रमुख रूप से स्क्वैट, लंज, ग्लूट ब्रिज, हिप थ्रस्ट, डंकी किक और स्टेप-अप्स जैसी एक्सरसाइज सम्मिलित हैं। ये एक्सरसाइज हमारे सभी दैनिक गतिविधियों को आसान बना देती हैं।
ग्लूट एक्सरसाइज का अर्थ व परिभाषा-
ग्लूट एक्सरसाइज का तात्पर्य, ऐसे व्यायाम से है, जो प्रत्यक्ष रूप से नितंबों की मांसपेशियों को सक्रिय और मजबूत करते हैं। अर्थात ये एक्सरसाइज ग्लूट मसल्स को टोन करने, मजबूत करने और उन्हें सही ढंग से कार्य करने के लिए किए जाते हैं। स्क्वैट, लंज, ग्लूट ब्रिज जैसी एक्सरसाइज इसके श्रेष्ठ उदाहरण हैं, जिन्हें घर पर भी आसानी से किया जा सकता है।
“ग्लूट एक्सरसाइज, वे व्यायाम होते हैं, जो हमारे शरीर की ग्लूट मसल्स, अर्थात नितंबों की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए किए जाते हैं।“ ये एक्सरसाइज शरीर की ताकत, संतुलन और सही पोस्चर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अतः ग्लूट एक्सरसाइज, न केवल शारीरिक क्षमता में वृद्धि करती हैं, बल्कि शरीर के आकार को भी सुन्दर बनाती हैं। ये व्यायाम फैट बर्न करने में मदद करते हैं और लोअर बॉडी को टोन करते हैं। महिलाओं के लिए ये आकार और टोनिंग में, जबकि पुरुषों के लिए ताकत शारीरिक क्षमता में वृद्धि करने में मदद करती है। अतः ग्लूट एक्सरसाइज पुरुष और महिलाओं, दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी होती हैं। नियमित रूप से, ग्लूट एक्सरसाइज करने से पीठ दर्द कम हो जाता है, चलने-फिरने में आसानी हो जाती हैं और चोट लगने का खतरा भी कम हो जाता है। इसलिए स्वस्थ और मजबूत शरीर के लिए ग्लूट एक्सरसाइज अत्यंत आवश्यक हैं।
ब्लॉग का उद्देश्य-
इस ब्लॉग का प्रमुख उद्देश्य पाठकों को ग्लूट एक्सरसाइज की सम्पूर्ण जानकारी से अवगत कराना है। ग्लूट एक्सरसाइज के महत्व, प्रकार और सही तरीके को सरल हिंदी में समझाना है। अधिकांश लोग प्रायः ग्लूट एक्सरसाइज को केवल शेपिंग तक ही सीमित समझते हैं, जबकि ये वास्तव में, शरीर की कार्य क्षमता, संतुलन, स्थिरता और मजबूत स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं।
ब्लॉग के माध्यम से, पाठक यह जान सकते हैं, कि-
- ग्लूट मसल्स क्या हैं और इनके मजबूत होने के क्या लाभ हैं।
- शुरुआती, इंटरमीडिएट और एडवांस स्तर की एक्सरसाइज कैसे करें।
- महिलाओं और पुरुषों के लिए ग्लूट एक्सरसाइज से लाभ क्या है।
- एक्सरसाइज के साथ सही डाइट और पानी की आदत क्यों आवश्यक है।
इस ब्लॉग का उद्देश्य केवल जानकारी देना ही नहीं है, बल्कि पाठकों को नियमित और सही अभ्यास की प्रेरणा देना भी है। इस ब्लॉग के माध्यम से, यह सुनिश्चित करना है, कि कोई भी व्यक्ति बिना चोट के, घर पर ही, ग्लूट एक्सरसाइज के द्वारा ग्लूट मांसपेशियों को मजबूत करके स्वस्थ जीवनशैली अपना सके।
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शुरुआती लोगों के लिए ग्लूट एक्सरसाइज-
यदि आप एक्सरसाइज की शुरुआत कर रहे हैं, तो इसके लिए यह आवश्यक है, कि आप आसान और सुरक्षित व्यायाम से ही, इसकी शुरुआत करें। क्योंकि शुरुआती लोगों की मांसपेशियाँ पूरी तरह सक्रिय और मजबूत नहीं होतीं हैं। इसलिए बहुत अधिक कठिन एक्सरसाइज करने से दर्द या चोट का सामना करना पड़ लग सकता है। शुरुआती लोगों के लिए, नीचे बताई गई ग्लूट एक्सरसाइज बिल्कुल सही हैं और इन्हें घर पर भी आसानी से किया जा सकता है।
1. स्क्वाट-

स्क्वाट, एक बेसिक लेकिन अत्यंत प्रभावशाली ग्लूट एक्सरसाइज है, जो विशेष रूप से ग्लूट मसल्स, जांघों और कमर की मजबूती के लिए की जाती है। यह ग्लूट एक्सरसाइज शरीर की क्षमता और संतुलन दोनों को बढ़ा देती है और दैनिक गतिविधियों को आसान बना देती है। स्क्वैट, घर पर बिना किसी मशीन के, आसानी से की जा सकती है। फिटनेस की शुरुआत के लिए यह एक बेहतरीन एक्सरसाइज मानी जाती है।
करने की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम, सावधान मुद्रा में खड़े हो जाएं। अपने पैरों को कंधों की चौड़ाई जितना फैलाएं। अब धीरे-धीरे घुटनों को मोड़ते हुए नीचे बैठें, जैसे आप कुर्सी पर बैठने जा रहे हों। इस दौरान रीढ़ की हड्डी सीधी रखें और छाती बाहर की ओर हो। फिर धीरे-धीरे वापस खड़े हो जाएं। शुरुआत में यह ग्लूट एक्सरसाइज, 10–12 रेप्स के 2 सेट काफी होते हैं। जैसे-जैसे क्षमता बढ़े, सेट और रेप्स बढ़ाए जा सकते हैं।
लाभ-
- ग्लूट मसल्स मजबूत हो जाती हैं।
- जांघों और घुटनों की क्षमता बढ़ जाती हैं।
- बॉडी पोस्चर सुधर जाता हैं।
- फैट बर्न में मदद मिल जाती हैं।
2. ग्लूट ब्रिज-

ग्लूट ब्रिज, एक आसान और प्रभावशाली एक्सरसाइज है, जो विशेष रूप से ग्लूट मसल्स को मजबूत करने के लिए की जाती है। यह एक्सरसाइज शुरुआती लोगों के लिए बहुत सुरक्षित मानी जाती है और इसे घर पर बिना किसी मशीन के किया जा सकता है। ग्लूट ब्रिज, प्रतिदिन के व्यायाम में सम्मिलित करने के लिए एक बेहतरीन ग्लूट एक्सरसाइज है।
करने की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम, पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। घुटनों को मोड़ लें और पैरों को जमीन पर सपाट रखें। हाथ शरीर के बगल में रखें। अब धीरे-धीरे हिप्स को ऊपर उठाएं, जब तक कि कंधे, कमर और घुटने एक सीधी लाइन में न आ जाएं। इस पोज़िशन में 2–3 सेकंड रुकें और ग्लूट मसल्स को टाइट रखें। फिर धीरे-धीरे हिप्स को नीचे लाएं। शुरुआत में यह ग्लूट एक्सरसाइज, 10–15 रेप्स के, 2 सेट पर्याप्त होते हैं।
लाभ-
- ग्लूट मसल्स मजबूत होती हैं।
- कमर पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता है।
- लंबे समय तक बैठने से कमजोर हुई मसल्स एक्टिव होती हैं।
- पीठ और हिप्स को बेहतर सपोर्ट मिलता है।
3. डंकी किक-

डंकी किक, एक आसान और प्रभावशाली ग्लूट एक्सरसाइज है, जो विशेष रूप से ग्लूट मसल्स को टारगेट या मजबूत करती है। यह एक्सरसाइज शुरुआती लोगों के लिए बहुत सुरक्षित मानी जाती है। यह ग्लूट एक्सरसाइज, घर पर बिना किसी उपकरण के किया जा सकता है। डंकी किक धीरे-धीरे ग्लूट्स को मजबूत करती है और आगे की कठिन एक्सरसाइज के लिए शरीर को तैयार भी करती है।
करने की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम, हाथों और घुटनों के बल जमीन पर आ जाएं। पीठ सीधी रखें और गर्दन को रिलैक्स करें। अब एक पैर को घुटने मोड़े हुए पीछे और ऊपर की ओर अधिक से अधिक उठाएं, जैसे आप दीवार को पैर से धक्का दे रहे हों। ऊपर जाकर 1–2 सेकंड रुकें और फिर धीरे-धीरे पैर नीचे लाएं। इसके बाद दूसरे पैर से भी यही प्रक्रिया दोहराएं। हर पैर से 10–15 रेप्स के, 2 सेट से शुरुआत करें।
एक्सरसाइज को लगातार 10 से 15 बार करना = 1 सेट
एक्सरसाइज को दो बार दोहराना = 2 सेट
लाभ-
- ग्लूट मसल्स को एक्टिव और मजबूत बनाती है।
- बैलेंस और कंट्रोल बेहतर होता है।
- कमर और हिप्स पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता है।
- शुरुआती लोगों के लिए सुरक्षित एक्सरसाइज है।
अतः इन सभी ग्लूट एक्सरसाइज को सही ढंग से और नियमितता के साथ करने से, शुरुआती लोग भी सुरक्षित रूप से मजबूत ग्लूट मसल्स बना सकते हैं।
इंटरमीडिएट लेवल ग्लूट एक्सरसाइज-
जब शुरुआती ग्लूट एक्सरसाइज करने के बाद, शरीर मजबूत होने लगे और प्रतिदिन की गतिविधियां आसान लगने लगें, तब इंटरमीडिएट लेवल की ग्लूट एक्सरसाइज शुरू की जाती हैं। इस स्तर की एक्सरसाइज ग्लूट मसल्स पर अधिक प्रभाव डालती हैं और क्षमता के साथ-साथ शेप भी बेहतर बनाती हैं। नीचे इंटरमीडिएट लेवल की सबसे असरदार ग्लूट एक्सरसाइज को बताया गया है।
1. लंजेस-

लंजेस, एक असरदार ग्लूट एक्सरसाइज है, जो ग्लूट मसल्स, जांघों और घुटनों को मजबूत करने में मदद करती है। यह ग्लूट एक्सरसाइज शारीरिक संतुलन, क्षमता और नियंत्रण को बेहतर बनाती है और शुरुआती से लेकर इंटरमीडिएट लेवल तक के लोगों के लिए अत्यंत लाभदायक होती है।
करने की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम, सीधे खड़े हो जाएं और रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। अब एक पैर को आगे की ओर बढ़ाएं और दोनों घुटनों को मोड़ते हुए नीचे आएं। आगे वाले पैर का घुटना 90 डिग्री के एंगल पर होना चाहिए और पीछे वाला घुटना जमीन के पास जाए। फिर आगे वाले पैर की एड़ी से दबाव डालते हुए वापस खड़े हो जाएं। इसके बाद दूसरे पैर से भी यही प्रक्रिया दोहराएं। हर पैर से 10–12 रेप्स के, 2–3 सेट पर्याप्त होते हैं।
सही आसन-
लंज करते समय पीठ सीधी रखें और छाती बाहर की ओर हो। आगे वाला घुटना पैर की उंगलियों से अधिक आगे न जाए। शरीर का वजन एड़ियों पर रखें, जिससे ग्लूट मसल्स अच्छे से एक्टिव हों।
लंजेस के प्रकार-
- फॉरवर्ड लंज- पैर आगे की ओर बढ़ाकर की जाती है।
- बैक लंज- पैर पीछे की ओर ले जाकर की जाती है।
लाभ-
- ग्लूट्स और जांघें मजबूत होती हैं।
- बॉडी बैलेंस सुधरता है।
- घुटनों और हिप्स को मजबूती मिलती है।
लंजेस को सही ढंग व क्रम से करने पर बेहतर और सुरक्षित परिणाम मिलते हैं।
2. हिप थ्रस्ट-

हिप थ्रस्ट, एक अत्यंत प्रभावशाली ग्लूट एक्सरसाइज है, जिसे विशेष रूप से ग्लूट मांसपेशियों के विकास और क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह ग्लूट एक्सरसाइज, ग्लूट्स को सीधे टारगेट या मजबूत करती है, अतः इसकी गणना बेस्ट ग्लूट-बिल्डिंग एक्सरसाइज में किया जाता है। यह ग्लूट एक्सरसाइज, ग्लूट मसल्स को सीधे टारगेट या मजबूत करती है, जिससे उनकी क्षमता और आकार दोनों में सुधार होता है।
करने की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम, पीठ के ऊपरी भाग को किसी बेंच, सोफे या मजबूत कुर्सी पर टिकाएं। पैर जमीन पर सपाट रखें और घुटनों को मोड़ लें। अब धीरे-धीरे हिप्स को ऊपर उठाएं, जब तक कि कंधे, कमर और घुटने एक सीधी लाइन में न आ जाएं। ऊपर की स्थिति में 2–3 सेकंड रुकें और ग्लूट मसल्स को कसकर पकड़ें। फिर धीरे-धीरे हिप्स को नीचे लाएं। शुरुआत में 10–12 रेप्स के, 2–3 सेट पर्याप्त होते हैं।
लाभ-
- ग्लूट मांसपेशियों का विकास तेजी से होता है।
- शरीर के निचले भाग लोअर बॉडी की क्षमता बढ़ती है।
- शरीर का आकार और टोनिंग में सुधार होता है।
- पीठ और कूल्हों के लिए बेहतर सपोर्ट मिलता है।
ग्नियमित रूप से हिप थ्रस्ट, ग्लूट एक्सरसाइज करने पर बेहतर और सुरक्षित परिणाम मिलता है।
3. स्टेप-अप्स-

स्टेप-अप्स, एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली ग्लूट एक्सरसाइज है, जो ग्लूट मसल्स, जांघों और घुटनों को मजबूत करने में मदद करती है। यह एक्सरसाइज शारीरिक संतुलन और स्थिरता को भी बेहतर बनाती है और इसे घर पर भी आसानी से किया जा सकता है।
करने की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम, किसी मजबूत स्टूल, सीढ़ी या बेंच के सामने खड़े हो जाएं। एक पैर को स्टेप पर रखें और उसी पैर की एड़ी से दबाव डालते हुए शरीर को ऊपर उठाएं। जब दोनों पैर ऊपर आ जाएं, तो धीरे-धीरे वापस नीचे उतरें। फिर दूसरे पैर से यही प्रक्रिया दोहराएं। प्रत्येक पैर से 10–12 रेप्स के, 2–3 सेट पर्याप्त होते हैं।
लाभ-
- ग्लूट मसल्स मजबूत होती हैं।
- जांघों और घुटनों की ताकत बढ़ती है
- बॉडी बैलेंस सुधरता है।
- घर पर बिना मशीन के की जा सकती है।
- स्टेप-अप्स रोज़मर्रा की मूवमेंट को आसान बनाती हैं।
- निचले भाग को ज्यादा मजबूत और एक्टिव बनाती हैं।
इंटरमीडिएट लेवल की ये एक्सरसाइज ग्लूट मसल्स को अगले स्तर तक ले जाती हैं और शरीर को ज्यादा ताकतवर बनाती हैं।
एडवांस ग्लूट एक्सरसाइज-
जब आपकी ग्लूट मसल्स मजबूत हो जाएं और इंटरमीडिएट लेवल की सभी ग्लूट एक्सरसाइज आसानी से होने लगें, तब एडवांस ग्लूट एक्सरसाइज की जाती हैं। ये एक्सरसाइज ज्यादा ताकत, कंट्रोल और बैलेंस की मांग करती हैं और ग्लूट मसल्स को गहराई से टारगेट करती हैं। कुछ प्रभावी एडवांस ग्लूट एक्सरसाइज नीचे बताई गई हैं।
1. बुल्गेरियन स्प्लिट स्क्वाट-

बुल्गेरियन स्प्लिट स्क्वाट, एक एडवांस लेवल की ग्लूट एक्सरसाइज है, जो ग्लूट मसल्स, जांघों और बैलेंस को मजबूत करने के लिए की जाती है। इसमें एक पैर पर अधिक भार पड़ता है, इसलिए यह मसल की क्षमता और स्थिरता दोनों में वृद्धि करती है।
करने की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम, किसी बेंच, कुर्सी या स्टूल के सामने खड़े हो जाएं। एक पैर को पीछे उठाकर बेंच पर रखें और दूसरा पैर आगे रखें। अब धीरे-धीरे आगे वाले पैर के घुटने को मोड़ते हुए नीचे जाएं। ध्यान रखें कि रीढ़ की हड्डी सीधी अर्थात पीठ सीधी रहे और शरीर का कुल वजन आगे वाले पैर की एड़ी पर हो। फिर उसी पैर से दबाव डालते हुए वापस खड़े हो जाएं। हर पैर से 8–10 रेप्स के 2–3 सेट पर्याप्त होते हैं।
लाभ-
- ग्लूट मसल्स पर गहरा प्रभाव होता है।
- बॉडी बैलेंस और कंट्रोल बेहतर होता है।
- जांघों और हिप्स मजबूत होते हैं।
- शरीर के निचले अंगों की क्षमता बढ़ती है।
यह ग्लूट एक्सरसाइज, केवल सही विधि और नियंत्रण के साथ ही करनी चाहिए।
2. सूमो स्क्वाट-

सूमो स्क्वाट, स्क्वाट का एक विशेष रूप है, जो ग्लूट मसल्स के साथ-साथ आंतरिक जांघों को भी मजबूत व टारगेट करता है। इसमें पैरों की स्थिति, कंधों की चौड़ाई से अधिक होती है, इसलिए यह ग्लूट आकार और क्षमता बढ़ाने में अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
करने की विधि-
सीधे खड़े हो जाएं और पैरों को कंधों से अधिक चौड़ा फैलाएं, जिसमें और पैरों की उंगलियाँ बाहर की ओर हों। रखें। अब धीरे-धीरे घुटनों को मोड़ते हुए नीचे बैठें, जैसे आप जमीन की ओर बैठ रहे हों। ध्यान रखें, कि रीढ़ की हड्डी सीधी रहे और छाती बाहर की ओर हो। नीचे जाकर कुछ सेकंड रुकें और फिर एड़ियों पर दबाव डालते हुए वापस खड़े हो जाएं। शुरुआत में 10–12 रेप्स के 2–3 सेट पर्याप्त होते हैं।
लाभ-
- ग्लूट मसल्स मजबूत और टोन होती हैं।
- अंदरूनी जांघों पर अच्छा असर पड़ता है।
- लोअर बॉडी की ताकत बढ़ती है।
- बैलेंस और स्टेबिलिटी में सुधार होता है।
- ग्लूट शेप सुधारने में मदद करता है।
सुमो स्क्वैट को सही ढंग व क्रम से करने पर बेहतर और सुरक्षित परिणाम मिल जाते हैं।
3. सिंगल लेग हिप थ्रस्ट-

सिंगल लेग हिप थ्रस्ट, एक एडवांस ग्लूट एक्सरसाइज है, जो ग्लूट मसल्स को गहराई से मजबूत व टारगेट करती है। इसमें एक पैर पर पूरा फोकस होता है, जिससे मांसपेशियों की क्षमता, संतुलन और नियंत्रण बेहतर हो जाता है।
करने की विधि-
सबसे पहले पीठ के ऊपरी हिस्से को किसी बेंच या सोफे पर टिकाएं। एक पैर जमीन पर रखें और दूसरा पैर घुटने से मोड़कर हवा में उठाएं। अब जमीन पर रखे पैर की एड़ी से दबाव डालते हुए हिप्स को ऊपर उठाएं। ऊपर की पोज़िशन में 2–3 सेकंड रुकें और ग्लूट मसल्स को कसकर पकड़ें। फिर धीरे-धीरे हिप्स को नीचे लाएं और पैर बदलकर दोहराएं। हर पैर से 8–10 रेप्स के 2–3 सेट पर्याप्त होते हैं।
लाभ-
- ग्लूट मसल्स की ताकत और शेप में सुधार हो जाता है।
- शरीर का संतुलन और स्थिरता बढ़ जाती है।
- एक तरफ की कमजोर मसल्स मजबूत हो जाती हैं।
- शरीर के निचले अंगों में नियंत्रण बेहतर हो जाता है।
यह ग्लूट एक्सरसाइज तभी करें, जब बेसिक हिप थ्रस्ट आसानी से होने लगे।
महत्वपूर्ण सुझाव-
- हमेशा सही फॉर्म पर ध्यान दें।
- वजन धीरे-धीरे बढ़ाएं।
- दर्द होने पर एक्सरसाइज रोक दें।
एडवांस ग्लूट एक्सरसाइज सही ढंग से करने पर ही बेहतर परिणाम देती हैं।
महिलाओं के लिए ग्लूट एक्सरसाइज से लाभ-
महिलाओं के लिए ग्लूट एक्सरसाइज, केवल फिट दिखने के लिए ही नहीं, बल्कि शरीर को मजबूत और संतुलित रखने के लिए भी अत्यंत आवश्यक होती हैं। सही ढंग से की गई ग्लूट एक्सरसाइज, शरीर के निचले भाग का आकार बेहतर होती है और प्रतिदिन की गतिविधियां आसान हो जाते हैं।
1. शरीर के आकार को टोन करने में-
ग्लूट एक्सरसाइज महिलाओं के शरीर के आकार को टोन करने में मदद करती हैं। ये नितंबों और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं, जिससे शरीर को एक शेप्ड व फिट लुक मिलता है। ग्लूट एक्सरसाइज के नियमित अभ्यास से ढीलापन कम हो जाता है और शरीर अधिक सक्रिय हो जाता है।
2. हार्मोन का संतुलन-
ग्लूट एक्सरसाइज का नियमित अभ्यास, शरीर में हार्मोन का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। ग्लूट एक्सरसाइज से तनाव कम हो जाता है और एनर्जी लेवल बढ़ जाता है, जिससे महिलाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से, बेहतर होने का अनुभव होता है।
3. घर पर करने योग्य व्यायाम-
स्क्वैट, ग्लूट ब्रिज, डंकी किक और लंज जैसी ग्लूट एक्सरसाइज, महिलाएं घर पर बिना किसी मशीन के आसानी से कर सकती हैं। इसके लिए अधिक जगह या समय की आवश्यकता नहीं होती है।
महत्वपूर्ण सुझाव-
- एक्सरसाइज से पहले वार्म-अप जरूर करें।
- ज्यादा वजन उठाने से बचें।
- सही फॉर्म बनाए रखें।
- दर्द होने पर तुरंत रुकें।
इन सभी बातों को ध्यान रखकर, महिलाएं सुरक्षित रूप से ग्लूट एक्सरसाइज कर सकती हैं।
पुरुषों के लिए ग्लूट एक्सरसाइज से लाभ-
पुरुषों के लिए ग्लूट एक्सरसाइज अत्यंत आवश्यक होती हैं, क्योंकि ये शरीर की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मजबूत ग्लूट मसल्स से, शरीर न केवल अधिक सशक्त हो जाता है, बल्कि कार्य क्षमता भी बढ़ जाती है।
1. स्ट्रेंथ और पावर बढ़ाने में-
ग्लूट एक्सरसाइज, जैसे- स्क्वैट, हिप थ्रस्ट और डेडलिफ्ट पुरुषों की स्ट्रेंथ और पावर को बढ़ाने में मदद करती हैं। ये एक्सरसाइज भारी वजन उठाने, तेजी से दौड़ने और बेहतर सहनशक्ति के लिए अत्यंत आवश्यक होती हैं।
2. लोअर बॉडी ट्रेनिंग-
लोअर बॉडी ट्रेनिंग में, ग्लूट्स एक्सरसाइज का बड़ा योगदान होता है। मजबूत ग्लूट्स से जांघें, हिप्स और घुटने अधिक स्थिर रहते हैं, जिससे चोट लगने का खतरा कम हो जाता है। इससे पूरे शरीर की कार्य क्षमता भी बेहतर हो जाती है।
ग्लूट एक्सरसाइज के साथ डाइट टिप्स-
ग्लूट एक्सरसाइज से सही परिणाम पाने के लिए केवल व्यायाम ही नहीं, बल्कि सही डाइट भी आवश्यक होती है। संतुलित आहार के बिना, मांसपेशियों की ग्रोथ और रिकवरी सही ढंग से नहीं हो पाती है। ग्लूट एक्सरसाइज के साथ आवश्यक डाइट टिप्स, नीचे बताए गए हैं।
1. प्रोटीन का महत्व-
प्रोटीन मसल्स बनाने और उन्हें मरम्मत करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ग्लूट एक्सरसाइज के बाद मसल्स को रिकवरी के लिए प्रोटीन की आवश्यकता होती है। दूध, दही, पनीर, दालें, अंडे, सोया और नट्स प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।
2. पर्याप्त पानी पीने की आदत-
ग्लूट एक्सरसाइज के समय, शरीर से पसीने के रूप में पानी निकल जाता है। यदि शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो थकान जल्दी हो जाती है और मांसपेशियों में खिंचाव भी आ जाता है। दिनभर में पर्याप्त पानी पीना, मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और फैट बर्न में भी मदद करता है।
3. ग्लूट एक्सरसाइज से पहले और बाद में-
ग्लूट एक्सरसाइज से पहले हल्का और ऊर्जा देने वाला नाश्ता, जैसे फल या ओट्स लेना बेहतर रहता है। एक्सरसाइज के बाद प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन, मांसपेशियों की रिकवरी में मदद करता है।
4. गलत डाइट से बचाव-
अधिक तला-भुना, जंक फूड और मीठा खाने से बचना चाहिए। ये फैट को बढ़ा देते हैं और ग्लूट एक्सरसाइज का प्रभाव कम कर देते हैं। इसके लिए संतुलित डाइट ही सबसे बेहतर होती है।
निष्कर्ष-
ग्लूट एक्सरसाइज, केवल शरीर को सही शेप देने के लिए ही नहीं, बल्कि शरीर की शक्ति, संतुलन और स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं। ये मांसपेशियां मजबूत होने पर पीठ और कूल्हे को क्षमता प्रदान करती हैं, चोट के खतरे को कम करती हैं और शरीर की कार्य-क्षमता को बेहतर बनाती हैं।
शुरुआती बदलाव जल्दी दिखाई देते हैं, लेकिन स्थायी और अच्छे परिणाम के लिए ग्लूट एक्सरसाइज का नियमित अभ्यास अत्यंत आवश्यक है। अतः प्रतिदिन एक्सरसाइज करना और सही ढंग से पालन करना आवश्यक है।
एक्सरसाइज के साथ सही डाइट, पर्याप्त पानी और आराम भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। शुरूआत में हल्की और आसान एक्सरसाइज से अभ्यास शुरु करें और धीरे-धीरे इंटरमीडिएट और एडवांस लेवल की एक्सरसाइज को दैनिक जीवनशैली में सम्मिलित करें। इससे मांसपेशियां सुरक्षित और मजबूत बन जाती हैं।
धैर्य और लगातार अभ्यास के साथ, ग्लूट एक्सरसाइज के, आप न केवल ग्लूट्स को मजबूत बनाएंगे बल्कि पूरे शरीर की कार्य क्षमता और फिटनेस भी बढ़ जाएगी। यही ग्लूट एक्सरसाइज का सार है।