रियर डेल्ट एक्सरसाइज: भूमिका-
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आज की व्यस्त जीवनशैली में, ऑफिस के कार्य का दबाव, पढ़ाई का तनाव, अनियमित दिनचर्या आदि के कारण अधिकांश लोग कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल के साथ लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर कार्य करते रहते हैं। यही आदत धीरे-धीरे हमारे शरीर के पोस्चर को बिगाड़ देती है। इसी कारण कंधे आगे की ओर झुकने लगते हैं, गर्दन में भारीपन होने का अनुभव होता है और कभी-कभी बिना कार्य किये ही, कंधों में लगातार दर्द बना रहता है। यदि इन सभी समस्याओं से आप भी पीड़ित हैं, तो इसका एक बड़ा कारण कमजोर रियर डेल्ट होता है। ऐसी स्थिति में, रियर डेल्ट एक्सरसाइज के द्वारा इसका समाधान किया जाता है।
इन परिस्थितियों में, दर्द होने पर लोग प्रायः दवाइयों या मसाज का सहारा लेते हैं, लेकिन इसका वास्तविक समाधान, तो रियर डेल्ट मसल्स को मजबूत बनाना ही होता है। सही ढंग से की गई रियर डेल्ट एक्सरसाइज, न केवल कंधों को क्षमता प्रदान करती है, बल्कि धीरे-धीरे आपके बिगड़े हुए पोस्चर को भी सुधार देती है। जब कंधे पीछे से मजबूत होते हैं, तो शरीर अपने-आप सीधा दिखने लगता है। इसके लिए घंटों जिम में पसीना बहाने की जरूरत नहीं। इसके लिए कुछ आसान और सही ढंग से की गई एक्सरसाइज, थोड़ी नियमितता और धैर्य, केवल इतना ही काफी है। यदि आप दर्द-मुक्त और आत्मविश्वास से भरा हुआ सीधा पोस्चर चाहते हैं, तो रियर डेल्ट एक्सरसाइज शुरू करें।
रियर डेल्ट मसल्स क्या हैं?
रियर डेल्ट मसल्स कंधे की त्रिभुजाकार मांसपेशियों का पिछला भाग होता है। अर्थात रियर डेल्ट मसल्स, कंधों को पीछे से सहारा देती हैं और शरीर को संतुलन में रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये मसल्स हाथों को पीछे की ओर ले जाने में भी मदद करती हैं। कंधे की मांसपेशियों के तीन मुख्य भाग होते हैं।
- फ्रंट डेल्ट, अर्थात आगे की ओर का भाग।
- साइड डेल्ट, अर्थात डेल्टॉइड मांसपेशी के बीच का भाग।
- रियर डेल्ट, अर्थात पीछे की ओर का भाग।
इनमें रियर डेल्ट ही सबसे अधिक नजरअंदाज की जाने वाली मसल्स होती हैं, जबकि यह कंधों की मजबूती और संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है। रियर डेल्ट मसल्स, कंधे के पीछे शोल्डर ब्लेड के पास स्थित होती हैं। जब आप किसी चीज को पीछे की तरफ खींचते हैं, जैसे- रोइंग मूवमेंट, फेस पुल या हाथ पीछे ले जाना, ये मसल्स तभी सक्रिय होती हैं। इसके अतिरिक्त ये मसल्स, कंधे के जोड़ को स्थिर रखने का भी कार्य करती हैं, जिससे चोट लगने का खतरा कम हो जाता है।
यदि रियर डेल्ट मसल्स मजबूत होती हैं, तो शरीर का पोस्चर बेहतर रहता है और कंधे सीधे व संतुलित दिखते हैं। वहीं जब रियर डेल्ट मसल्स कमजोर होती है, तो कंधे आगे की ओर झुकने लगते हैं, दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है और आप चाहकर भी सीधा खड़े नहीं रह पाते हैं, क्योंकि कंधों में वह क्षमता ही नहीं बचती, जो शरीर को सही पोजीशन में रख सके। जिम में किये जाने वाले बैक व शोल्डर एक्सरसाइज का भी पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। इसलिए स्वस्थ और संतुलित कंधों के लिए रियर डेल्ट एक्सरसाइज, उतना ही आवश्यक है, जितना अन्य शोल्डर मसल्स का।
स्वस्थ शरीर में रियर डेल्ट मसल्स की भूमिका-
हमारे दैनिक जीवनशैली में, रियर डेल्ट मसल्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब आप कुर्सी पर बैठकर, कोई वस्तु पीछे की ओर उठाते हैं, बैग को कंधे पर सही ढंग से संभालते हैं, लंबे समय तक बैठकर कार्य करते हैं या रोइंग एक्सरसाइज या पुल-अप, जैसे एक्सरसाइज करते हैं, तो इन सभी गतिविधियों में, रियर डेल्ट मसल्स हमारी मदद करती हैं। रियर डेल्ट मसल्स, बैक मसल्स के साथ मिलकर कार्य करती हैं। ये कंधों को आगे की ओर झुकने से भी रोकती हैं, जिससे सही पोस्चर बना रहता है। यदि यह मसल कमजोर हो जाए, तो गर्दन और कंधों में जल्दी थकान और दर्द का अनुभव होने लगता है।
स्पोर्ट्स और जिम में भी, रियर डेल्ट मसल्स का विशेष रूप से महत्व है। क्रिकेट, बैडमिंटन, तैराकी या वेट ट्रेनिंग जैसे खेलों में, कंधों की स्थिरता अत्यंत आवश्यक होती है। मजबूत रियर डेल्ट मसल्स, न केवल अच्छे प्रदर्शन करती हैं, बल्कि चोट के खतरे को भी कम कर देती हैं। इसका मुख्य कार्य हाथ को पीछे ले जाना और कंधों के जोड़ को स्थिर रखना होता है।
फ्रंट रियर डेल्ट का मुख्य कार्य हाथ को आगे की ओर ले जाना और साइड डेल्ट का कार्य हाथ को बगल की ओर उठाना होता है, जबकि रियर डेल्ट हाथ को पीछे खींचने और कंधों को बैलेंस में रखने का कार्य करती है। अतः स्वस्थ शरीर के लिए, तीनों डेल्ट मसल्स का संतुलित रूप से मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है।
रियर डेल्ट मसल्स के कमजोर होने के दुष्परिणाम-
रियर डेल्ट मसल्स का कमजोर होना ही, कई ऐसे समस्याओं को जन्म देता है, जिनका प्रभाव न केवल जिम तक ही सीमित रहता है, बल्कि हमारे दैनिक जीवन की गतिविधियों पर भी स्पष्ट दिखाई देता है।
1. गलत पोस्चर की समस्या-
जब रियर डेल्ट मसल्स कमजोर होती हैं, तो कंधे धीरे-धीरे आगे की ओर झुकने लगते हैं। इससे शरीर का ऊपरी भाग झुका हुआ दिखाई देता है और आत्मविश्वास पर भी इसका गलत प्रभाव पड़ता है।
2. कंधे और गर्दन में दर्द-
जब रियर डेल्ट मसल्स कमजोर होती हैं, तो कंधे और गर्दन में दर्द की समस्या उत्पन्न होती है। क्योंकि यह मसल कंधों को स्थिर रखने का कार्य करती है, इसके कमजोर होने पर गर्दन और ट्रैप मसल्स पर अधिक दबाव पड़ता है। इसीलिए कई लोगों को बिना कार्य किए ही कंधों में जकड़न और दर्द का अनुभव होता है।
3. व्यायाम के समय चोट की संभावना-
व्यायाम के समय भी इसके दुष्परिणाम स्पष्ट दिखाई देते हैं। रियर डेल्ट मसल्स के कमजोर होने की वजह से चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है, विशेष रूप से बैक और शोल्डर एक्सरसाइज करते समय।
4. बैक एक्सरसाइज में समस्या-
रियर डेल्ट मसल्स के कमजोर होने से इसके अलावा, बैक एक्सरसाइज में समस्या उत्पन्न हो जाती है, क्योंकि रोइंग और पुलिंग मूवमेंट में रियर डेल्ट बैक मसल्स को सपोर्ट देती है।
5. कंधों का असंतुलित लुक-
कंधों का असंतुलित लुक भी एक आम समस्या है। सामने से कंधे अच्छे दिखते हैं, लेकिन लंबे समय तक जिम करने के बाद भी कंधे, पीछे से देखने पर वे फ्लैट और कमजोर दिखाई देते हैं।
अतः यदि आप मजबूत, दर्द-मुक्त और संतुलित कंधे चाहते हैं, तो रियर डेल्ट एक्सरसाइज करें।
रियर डेल्ट एक्सरसाइज क्या है?
रियर डेल्ट एक्सरसाइज, वे व्यायाम होते हैं जो कंधे की पिछली मांसपेशियों, या रियर डेल्ट मसल्स को मजबूत करने के लिए किए जाते हैं। अर्थात, ये एक्सरसाइज, कंधों को पीछे से क्षमता प्रदान करती हैं और उन्हें संतुलित व स्थिर बनाए रखती हैं। रियर डेल्ट एक्सरसाइज में, कुछ ऐसी गतिविधियां विशेष रूप से सम्मिलित हैं, जिनमें हाथों को पीछे की ओर ले जाना या खींचना पड़ता है। जैसे- बेंट ओवर रियर डेल्ट फ्लाई, फेस पुल, रिवर्स पेक डेक फ्लाई आदि। ये सभी एक्सरसाइज, न केवल कंधों को मजबूत रखती हैं, बल्कि बैक और शोल्डर वर्कआउट की परफॉर्मेंस भी बेहतर करती हैं।
अतः रियर डेल्ट एक्सरसाइज करने से, शरीर का पोस्चर सुधर जाता है, कंधे अधिक स्टेबल हो जाते हैं और चोट लगने का खतरा कम हो जाता है। इसीलिए स्वस्थ शरीर व संतुलित कंधों के लिए रियर डेल्ट एक्सरसाइज अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।
ब्लॉग का उद्देश्य-
इस ब्लॉग का प्रमुख उद्देश्य, पाठकों को आसान और स्पष्ट भाषा में, रियर डेल्ट एक्सरसाइज की सम्पूर्ण जानकारी से अवगत कराना है। क्योंकि आजकल अधिकांश लोग प्रायः कंधों की एक्सरसाइज करते समय, रियर डेल्ट एक्सरसाइज को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे खराब पोस्चर, कंधों में दर्द और मांसपेशियों में असंतुलन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। रियर डेल्ट एक्सरसाइज के माध्यम से, इन्हीं समस्याओं को सुलझाने और सही दिशा दिखाने के लिए, यह ब्लॉग लिखा गया है।
इस ब्लॉग के के माध्यम से, सभी पाठक यह जान जाएंगे, कि-
- रियर डेल्ट मसल्स क्या हैं
- स्वस्थ शरीर में रियर डेल्ट मसल्स की भूमिका क्या है
- रियर डेल्ट मसल्स के कमजोर होने के दुष्परिणाम क्या है
- रियर डेल्ट एक्सरसाइज क्या है
- रियर डेल्ट एक्सरसाइज करने के लाभ क्या हैं
- जिम में बेस्ट रियर डेल्ट एक्सरसाइज और इसके अंतर्गत रियर डेल्ट एक्सरसाइज के प्रमुख प्रकार कौन-कौन हैं
- घर पर होने वाली रियर डेल्ट एक्सरसाइज और इसके अंतर्गत रियर डेल्ट एक्सरसाइज के प्रमुख प्रकार कौन-कौन हैं
इस ब्लॉग के अंतर्गत सभी पाठकों को, अपने कंधों को दर्द-मुक्त, मजबूत और संतुलित बनाने के लिए रियर डेल्ट एक्सरसाइज के प्रति प्रेरित किया गया है। इस ब्लॉग का उद्देश्य लोगों को यह भी समझाना है, कि रियर डेल्ट एक्सरसाइज न केवल जिम केंद्रों, बल्कि घर पर भी आसानी से किया जा सकता है।
योग और व्यायाम ई-बुक, कैसे प्राप्त करें?
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इस ब्लॉग के समान अन्य ब्लॉग भी उपलब्ध हैं।
रियर डेल्ट एक्सरसाइज करने के लाभ-
रियर डेल्ट एक्सरसाइज को अपनी दैनिक जीवनशैली की गतिविधियों में सम्मिलित करने से कंधों की ताकत और संतुलन दोनों में, विशेष रूप से लाभ दिखाई देता है।
1. कंधों का पूर्ण विकास-
रियर डेल्ट एक्सरसाइज को अपनी दैनिक जीवनशैली की गतिविधियों में सम्मिलित करने से कंधों का पूर्ण विकास होना ही सबसे बड़ा लाभ है। जब फ्रंट, साइड और रियर, तीनों डेल्ट मसल्स एक समान रूप से ट्रेन होती हैं, तो कंधों का आकार काफी बेहतर हो जाता है।
2. बॉडी पोस्चर में सुधार-
रियर डेल्ट एक्सरसाइज करने का महत्वपूर्ण लाभ है, बॉडी पोस्चर में सुधार। इस एक्सरसाइज से मजबूत होकर, रियर डेल्ट कंधों को पीछे की ओर सपोर्ट देती है, जिससे शरीर अपने-आप सीधा रहने लगता है। जो लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, उनके लिए यह एक्सरसाइज विशेष रूप से लाभदायक होती है।
3. मजबूत और स्थिर कंधे-
रियर डेल्ट एक्सरसाइज करने से, जब रियर डेल्ट मजबूत होती है, तो कंधे अधिक मजबूत और स्थिर हो जाते हैं। इससे भारी वजन उठाते समय कंधों पर सही नियंत्रण और संतुलन बना रहता है। इसका सीधा प्रभाव बैक और शोल्डर वर्कआउट पर पड़ता है।
4. चोट से सुरक्षा-
रियर डेल्ट एक्सरसाइज करने से, रियर डेल्ट कंधे के जोड़ को स्थिर रखने में मदद करती है, जिससे जिम या स्पोर्ट्स के दौरान चोट से सुरक्षित हो जाता है।
5. दैनिक गतिविधियां आसान होना-
रियर डेल्ट एक्सरसाइज करने से, हमारे दैनिक जीवन की गतिविधियां आसान हो जाता है। वजन उठाना, बैग संभालना या लंबे समय तक सीधा बैठना पहले से अधिक आसान और सुरक्षित हो जाता है।
अतः रियर डेल्ट एक्सरसाइज, न केवल जिम के लिए, बल्कि एक स्वस्थ व संतुलित जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
जिम में बेस्ट रियर डेल्ट एक्सरसाइज-
जिम में, रियर डेल्ट को सही ढंग से ट्रेन करने के लिए, कुछ ऐसी एक्सरसाइज हैं, जो रियर डेल्ट मसल पर अधिक कार्य करती हैं और कंधों को मजबूत व संतुलित बनाती हैं। नीचे दी गई एक्सरसाइज शुरुआती और इंटरमीडिएट दोनों के लिए प्रभावशाली मानी जाती हैं।
1. रिवर्स पेक डेक फ्लाई-

रिवर्स पेक डेक फ्लाई, जिम में की जाने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण रियर डेल्ट एक्सरसाइज में से एक है। यह एक्सरसाइज, रियर डेल्ट को विशेष रूप से मजबूत करने के लिए की जाती है और मसल को अच्छे से आइसोलेट करती है।
अभ्यास की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम-
- रिवर्स पेक डेक मशीन पर बैठें।
- छाती को पैड से टिकाएं।
- हैंडल्स को पकड़ें।
- हाथों को पीछे की ओर फैलाएं।
- धीरे-धीरे वापस शुरुआती पोजीशन में लाएं।
सही फॉर्म-
- पीठ सीधी रखें।
- कंधे पीछे की ओर खींचें।
- झटका न लगाएं।
- मूवमेंट कंट्रोल में रखें।
रेप्स और सेट-
- शुरुआती लोगों के लिए- 12-15 रेप्स × 3 सेट।
- इंटरमीडिएट लोगों के लिए- 10-12 रेप्स × 3-4 सेट।
सामान्य गलतियां-
- बहुत ज्यादा वजन लेना।
- हाथों को झटके से चलाना।
- पीठ को मोड़ना।
- गर्दन आगे निकालना।
लाभ-
इसका नियमित अभ्यास करने पर-
- रियर डेल्ट मजबूत होती है।
- शोल्डर बैलेंस सुधरता है।
- पोस्चर बेहतर होता है।
- चोट का खतरा कम होता है।
- कंधे पीछे से भरे हुए दिखते हैं।
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2. बेंट ओवर डम्बल रियर डेल्ट फ्लाई-

बेंट ओवर डम्बल रियर डेल्ट फ्लाई, एक बेसिक और प्रभावशाली रियर डेल्ट एक्सरसाइज में से एक है। यह एक्सरसाइज कंधों की रियर डेल्ट को स्वस्थ, संतुलित और मजबूत करती है और कंधों का संतुलन सुधारने में मदद करती है। इसे जिम और घर, दोनों जगह आसानी से किया जा सकता है।
अभ्यास की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम-
- दोनों हाथों में हल्के डम्बल पकड़ें।
- घुटनों को थोड़ा मोड़ें।
- कमर से आगे की ओर झुकें।
- पीठ सीधी रखें।
- हाथ नीचे की ओर लटकने दें।
- अब दोनों हाथों को साइड में धीरे-धीरे उठाएं।
- कंधों के लेवल तक हाथ आएं।
- फिर धीरे-धीरे नीचे लाएं।
सही फॉर्म-
इसके लिए-
- पीठ बिल्कुल सीधी रखें।
- गर्दन सामान्य स्थिति में रखें।
- गतिविधियों को नियंत्रण में रखें।
- झटका न लगाएं।
- कंधों को पीछे की ओर खींचें।
वजन चुनें-
इसके लिए-
- सदैव हल्के वजन से शुरुआत करें।
- ऐसा वजन लें जिससे फॉर्म खराब न हो।
- भारी वजन जरूरी नहीं।
सांस लेने की पद्धति-
- हाथ उठाते समय सांस बाहर छोड़ें।
- हाथ नीचे लाते समय सांस अंदर लें।
रेप्स और सेट-
- शुरुआती लोगों के लिए- 12-15 रेप्स × 3 सेट।
- इंटरमीडिएट लोगों के लिए- 10-12 रेप्स × 3-4 सेट
सामान्य गलतियां-
- बहुत भारी डम्बल लेना।
- पीठ को मोड़ना।
- हाथों को झटके से उठाना।
- फ्रंट डेल्ट से मूवमेंट करना।
लाभ-
इसका नियमित अभ्यास करने पर-
- रियर डेल्ट मजबूत होती है।
- शोल्डर बैलेंस सुधरता है।
- पोस्चर बेहतर होता है।
- बैक वर्कआउट में सुधार होता है।
- चोट का खतरा कम होता है।
3. केबल रियर डेल्ट फ्लाई-

केबल रियर डेल्ट फ्लाई, एक बेहतरीन रियर डेल्ट एक्सरसाइज है, जो कंधों की पिछली मांसपेशियों को सीधे टारगेट करती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है, कि इसमें सभी गतिविधियों में मांसपेशियों पर लगातार तनाव बनी रहती है, जिससे मांसपेशियों की सक्रियता और वृद्धि बेहतर ढंग से होती है।
अभ्यास की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम-
- केबल मशीन पर दोनों साइड लो पुली सेट करें।
- क्रॉस ग्रिप में हैंडल पकड़ें। जैसे- दायां हाथ बाईं केबल, बायां हाथ दाईं केबल।
- थोड़ा पीछे खड़े हों, घुटने हल्के मोड़ें।
- पीठ सीधी रखें।
- अब दोनों हाथों को साइड में फैलाएं
- जब हाथ कंधों के लेवल तक आएं और एक सेकंड रोकें।
- फिर धीरे-धीरे वापस शुरुआती पोजीशन में आएं।
सही फॉर्म-
इसके लिए-
- पीठ सीधी रखें।
- कंधों को पीछे खींचें।
- गतिविधियों को नियंत्रण में रखें।
- झटका न लगाएं।
- गर्दन सामान्य स्थिति में रखें।
केबल का लाभ-
- सभी गतिविधियों में मांसपेशियों पर लगातार तनाव बढ़ जाती है।
- मसल आइसोलेशन बेहतर हो जाती है।
- नियंत्रण और स्थिरता बढ़ जाती है।
- मांसपेशी विकास तेज हो जाती है।
किसके लिए उपयुक्त-
- इंटरमीडिएट लेवल जिम करने वाले, जिनकी रियर डेल्ट कमजोर है।
- जो शोल्डर डेवलपमेंट में बैलेंस चाहते हैं।
- जिन्हें डम्बल से पूरा मसल फील नहीं मिलता है।
रेप्स और सेट-
- शुरुआती लोगों के लिए- 12-15 रेप्स × 3 सेट
- इंटरमीडिएट लोगों के लिए- 10-12 रेप्स × 3-4 सेट
सामान्य गलतियां-
- बहुत ज्यादा वजन लेना।
- झटके से हाथ फैलाना।
- पीठ झुकाना।
- फ्रंट डेल्ट से मूवमेंट करना।
लाभ-
इसका नियमित अभ्यास करने पर-
- रियर डेल्ट मजबूत हो जाती है।
- शोल्डर बैलेंस सुधर जाता है।
- पोस्चर बेहतर हो जाता है।
- चोट का खतरा कम हो जाता है।
- प्रोफेशनल शोल्डर लुक मिल जाता है।
4. फेस पुल एक्सरसाइज-

केबल रियर डेल्ट फ्लाई, एक महत्वपूर्ण रियर डेल्ट एक्सरसाइज है, जो कंधों की पिछली मांसपेशियों को सीधे टारगेट करती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है, कि इसमें सभी गतिविधियों में मांसपेशियों पर लगातार तनाव बनी रहती है, जिससे मांसपेशियों की सक्रियता और वृद्धि बेहतर हो जाती है।
अभ्यास की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम-
- केबल मशीन पर दोनों साइड लो पुली सेट करें।
- क्रॉस ग्रिप में हैंडल पकड़ें। जैसे- दायां हाथ बाईं केबल, बायां हाथ दाईं केबल।
- थोड़ा पीछे खड़े हों, घुटने हल्के मोड़ें।
- पीठ सीधी रखें।
- अब दोनों हाथों को साइड में फैलाएं।
- जब हाथ कंधों के लेवल तक आएं, एक सेकंड रोकें।
- फिर धीरे-धीरे वापस शुरुआती पोजीशन में आएं।
सही फॉर्म-
इसके लिए-
- पीठ सीधी रखें।
- कंधों को पीछे खींचें।
- गर्दन सामान्य स्थिति में रखें।
- झटका न लगाएं।
- सभी गतिविधियों में नियंत्रण रखें।
केबल का लाभ-
- सभी गतिविधियों में मांसपेशियों पर लगातार टेंशन बनी रहती है।
- मसल आइसोलेशन बेहतर होती है ।
- नियंत्रण और स्थिरता बढ़ती है।
- मांसपेशी विकास तेज होती है।
किसके लिए उपयुक्त-
- जो कंधे के विकास में संतुलन चाहते हैं।
- इंटरमीडिएट लेवल जिम करने वाले, जिनकी रियर डेल्ट कमजोर है।
- जिन्हें डम्बल से मसल्स को पूरी तरह से महसूस नहीं होता है।
रेप्स और सेट-
- शुरुआती लोगों के लिए- 12-15 रेप्स × 3 सेट
- इंटरमीडिएट लोगों के लिए- 10-12 रेप्स × 3-4 सेट
सामान्य गलतियां-
- बहुत ज्यादा वजन लेना।
- झटके से हाथ फैलाना।
- पीठ झुकाना।
- फ्रंट डेल्ट से मूवमेंट करना।
लाभ-
इसका नियमित अभ्यास करने पर-
- रियर डेल्ट मजबूत होती है।
- शोल्डर बैलेंस सुधरता है।
- पोस्चर बेहतर होता है।
- चोट का खतरा कम होता है।
- प्रोफेशनल शोल्डर लुक मिलता है।
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शुरुआत करने वालों के लिए टिप्स-
इसके लिए हल्के वजन से शुरू करें और फॉर्म पर अधिक ध्यान दें। जल्दी-जल्दी करने से बचें और हर रेप को कंट्रोल में रखें।
अतः इन सभी रियर डेल्ट एक्सरसाइज को सही फॉर्म और नियमितता के साथ करने से रियर डेल्ट मजबूत होती है, कंधों का संतुलन सुधरता है और चोट का खतरा भी कम हो जाता है।
घर पर होने वाली रियर डेल्ट एक्सरसाइज-
आज के समय में हर किसी के पास जिम जाने का समय और सुविधा नहीं होती। ऐसे में रियर डेल्ट एक्सरसाइज, आप घर पर भी आसानी से कर सकते हैं। बिना मशीन के की गई एक्सरसाइज, न केवल सुविधाजनक होती हैं, बल्कि इससे शरीर पर बेहतर नियंत्रण भी हो जाता है। सही तकनीक और थोड़े अनुशासन के साथ, घर पर भी रियर डेल्ट को मजबूत किया जा सकता है।
A. डम्बल रियर डेल्ट फ्लाई (होम वर्जन)-

डम्बल रियर डेल्ट फ्लाई (होम वर्जन), घर पर करने वाली सबसे आसान और प्रभावशाली रियर डेल्ट एक्सरसाइज में से एक है। यदि आपके पास केवल हल्के डम्बल हैं, तब भी आप इस एक्सरसाइज से कंधों की पिछली मांसपेशियों को मजबूत बना सकते हैं। यह शुरुआती और इंटरमीडिएट, दोनों के लिए उपयुक्त है।
अभ्यास की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम-
- दोनों हाथों में हल्के डम्बल पकड़ें।
- घुटनों को थोड़ा मोड़ें।
- कमर से आगे की ओर झुकें।
- पीठ सीधी रखें।
- हाथ नीचे की ओर लटकने दें।
- अब दोनों हाथों को साइड में धीरे-धीरे उठाएं।
- कंधों के लेवल तक लाएं।
- एक सेकंड रोकें।
- फिर धीरे-धीरे नीचे लाएं।
सही फॉर्म-
इसके लिए-
- पीठ सीधी रखें।
- गर्दन सामान्य स्थिति में रखें।
- सभी गतिविधियों में नियंत्रण रखें।
- झटका न लगाएं।
- कंधों को पीछे की ओर खींचें।
कम वजन में कैसे करें-
- शुरुआत 1-3 किलो डम्बल से करें।
- अधिक वजन आवश्यक नहीं
- सही फॉर्म आवश्यक है।
- धीरे-धीरे वजन बढ़ाएं।
सांस लेने की पद्धति-
- हाथ उठाते समय सांस बाहर छोड़ें।
- हाथ नीचे लाते समय सांस अंदर लें।
रेप्स और सेट-
- शुरुआती लोगों के लिए- 12-15 रेप्स × 3 सेट
- इंटरमीडिएट लोगों के लिए- 10-12 रेप्स × 3-4 सेट
सामान्य गलतियां-
- भारी डम्बल लेना।
- पीठ झुकाना।
- हाथों को झटके से उठाना।
- फ्रंट डेल्ट से मूवमेंट करना।
लाभ-
इसका नियमित अभ्यास करने पर-
- रियर डेल्ट मजबूत होती है।
- शोल्डर बैलेंस सुधरता है।
- पोस्चर बेहतर होता है।
- घर पर आसान ट्रेनिंग।
- चोट का खतरा कम होता है।
अतिरिक्त सुझाव-
यदि डम्बल नहीं हैं, तो आप
- पानी की बोतल।
- बैग में किताब भरकर।
- रेसिस्टेंस बैंड।
से भी यह एक्सरसाइज कर सकते हैं।
B. रेजिस्टेंस बैंड रियर डेल्ट पुल-

रेजिस्टेंस बैंड रियर डेल्ट पुल, एक शानदार होम वर्कआउट एक्सरसाइज है, जो बिना मशीन और बिना भारी वजन के रियर डेल्ट मसल्स को मजबूत बनाती है। यह एक्सरसाइज विशेष रूप से, उन लोगों के लिए उपयुक्त है, जो घर पर ट्रेनिंग करते हैं, यात्रा करते हैं या जिम नहीं जाते हैं।
अभ्यास की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम-
- एक मजबूत रेजिस्टेंस बैंड लें।
- बैंड को सामने किसी पोल या दरवाजे के हैंडल में बांधें।
- दोनों हाथों से बैंड पकड़ें।
- सीधा खड़े हों, घुटने हल्के मोड़ें।
- हाथ सामने सीधे रखें।
- अब बैंड को अपनी तरफ खींचें।
- कोहनियों को बाहर की तरफ ले जाएं।
- कंधों के पास लाकर एक सेकंड रोकें।
- धीरे-धीरे हाथ वापस आगे ले जाएं।
सही फॉर्म-
इसके लिए-
- पीठ सीधी रखें।
- छाती हल्की बाहर रखें।
- कंधों को पीछे की ओर खींचें।
- सभी गतिविधियों में नियंत्रण रखें।
- गर्दन सामान्य स्थिति में रखें।
बैंड के लाभ-
- मशीन की जरूरत नहीं।
- ट्रैवल फ्रेंडली वर्कआउट।
- जॉइंट-फ्रेंडली एक्सरसाइज।
- कंट्रोल्ड टेंशन।
- सेफ और स्टेबल मूवमेंट।
रेप्स और सेट-
- शुरुआती लोगों के लिए- 15-20 रेप्स × 3 सेट
- इंटरमीडिएट लोगों के लिए- 12-15 रेप्स × 3-4 सेट
सामान्य गलतियां-
- बहुत तेज खींचना।
- झटके से मूवमेंट करना।
- गर्दन आगे निकालना।
- पीठ झुकाना।
किसके लिए उपयुक्त-
- होम वर्कआउट करने वाले लोगों के लिए।
- शुरुआती जिम करने वाले लोगों के लिए।
- पोस्टर सुधारने वाले लोगों के लिए।
- शोल्डर पेन से परेशान लोग लोगों के लिए।
- यात्रा करने वाले फिटनेस लवर्स के लिए।
बॉडीवेट एवं बैंड कॉम्बिनेशन से संबंधित सुझाव-
यदि आप घर पर पूरी शोल्डर ट्रेनिंग करना चाहते हैं, तो यह अभ्यास करें। जैसे-
- बैंड रियर डेल्ट पुल।
- बैंड साइड रेज।
- बैंड फ्रंट रेज।
- बैंड फेस पुल।
- बॉडीवेट रो मूवमेंट।
C. बॉडीवेट रियर डेल्ट मूवमेंट-
बॉडीवेट रियर डेल्ट मूवमेंट, उन लोगों के लिए सर्वोत्तम विकल्प है, जो बिना किसी इक्विपमेंट के घर पर रियर डेल्ट एक्सरसाइज करना चाहते हैं। यह एक्सरसाइज विशेष रूप से, शुरुआती लोगों, फिटनेस की शुरुआत करने वाले और उन लोगों के लिए सुरक्षित होती है जिन्हें जॉइंट पेन या शोल्डर स्ट्रेस की समस्या रहती है।
1. वॉल रियर डेल्ट रेज-

वॉल रियर डेल्ट रेज एक आसान, सेफ और असरदार बॉडीवेट रियर डेल्ट एक्सरसाइज है, जिसे बिना किसी इक्विपमेंट के घर पर किया जा सकता है। यह खासतौर पर शुरुआती लोगों, होम वर्कआउट करने वालों और उन लोगों के लिए बेस्ट है जिन्हें शोल्डर या गर्दन में दर्द की समस्या रहती है।
अभ्यास की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम-
- दीवार के सामने खड़े हों।
- दोनों हाथ सामने रखें।
- दीवार की तरफ थोड़ा झुकें।
- पीठ सीधी रखें।
- हाथों को साइड में धीरे-धीरे फैलाएं।
- कंधों के लेवल तक उठाएं।
- 1-2 सेकंड होल्ड करें
- धीरे-धीरे वापस नीचे लाएं।
सही फॉर्म-
इसके लिए-
- पीठ सीधी रखें।
- सभी गतिविधियों में नियंत्रण रखें।
- गर्दन सामान्य स्थिति में रखें।
- कंधों को पीछे की ओर खींचें।
- झटका न लगाएं।
रेप्स और सेट-
- शुरुआती लोगों के लिए- 15-20 रेप्स × 3 सेट
- इंटरमीडिएट लोगों के लिए- 12-15 रेप्स × 3-4 सेट
सामान्य गलतियां-
- गर्दन आगे निकालना।
- पीठ मोड़ना।
- हाथ झटके से उठाना।
- बहुत तेज मूवमेंट।
लाभ-
इसका नियमित अभ्यास करने पर-
- रियर डेल्ट एक्टिवेशन।
- पोस्चर में सुधार।
- कंधे की स्टेबिलिटी में सुधार।
- सुरक्षित होम वर्कआउट।
किसके लिए उपयुक्त-
- होम वर्कआउट करने वाले लोगों के लिए।
- शुरुआती जिम करने वाले लोगों के लिए।
- पोस्टर सुधारने वाले लोगों के लिए।
- कंधे का दर्द से परेशान लोग लोगों के लिए।
अतिरिक्त सुझाव-
इस एक्सरसाइज को आप दैनिक गतिविधियों, जैसे-
- वार्म-अप में
- एक्टिवेशन सेट में
- रिकवरी डे में
अवश्य सम्मिलित करें, इससे रियर डेल्ट अधिक सक्रिय हो जाएगी और मुख्य व्यायाम अधिक प्रभावशाली बनेगा।
2. प्रोन Y रेज-

प्रोन Y रेज एक प्रभावशाली, सुरक्षित और प्रोफेशनल लेवल की बॉडीवेट एक्सरसाइज है, जो रियर डेल्ट, ऊपरी पीठ और कंधे की स्थिरता की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है। यह एक्सरसाइज फिजियोथेरेपी, रिहैब ट्रेनिंग और एथलीट ट्रेनिंग में भी बहुत उपयुक्त होती है।
अभ्यास की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम-
- पेट के बल जमीन पर लेट जाएं।
- पैरों को सीधा रखें।
- हाथ ऊपर की तरफ Y शेप में फैलाएं।
- माथा जमीन से हल्का ऊपर रखें।
- अब दोनों हाथों को ऊपर उठाएं।
- कंधों को पीछे और नीचे की ओर खींचें।
- 1-2 सेकंड होल्ड करें।
- धीरे-धीरे हाथ नीचे रखें।
- रिलैक्स करें और दोहराएं।
सही फॉर्म-
इसके लिए-
- गर्दन सामान्य स्थिति में रखें।
- गतिविधियों को धीमा और नियंत्रण में रखें।
- कंधों को कानों की तरफ न उठाएं।
- पीठ के निचले हिस्से पर दबाव न डालें।
रेप्स और सेट-
- शुरुआती लोगों के लिए- 12-15 रेप्स × 3 सेट
- इंटरमीडिएट लोगों के लिए- 15-20 रेप्स × 3-4 सेट
सामान्य गलतियां-
- बहुत तेज मूवमेंट करना।
- गर्दन ज्यादा ऊपर उठाना।
- कमर में ज्यादा आर्च बनाना।
- हाथ झटके से उठाना।
लाभ-
इसका नियमित अभ्यास करने पर-
- रियर डेल्ट मजबूत होती है।
- ऊपरी पीठ मजबूत होती है।
- बॉडी पोस्चर सुधरता है।
- कंधे की स्थिरता बढ़ती है।
- चोट का खतरा कम होता है।
किसके लिए उपयुक्त–
- होम वर्कआउट करने वाले लोगों के लिए।
- शुरुआती जिम करने वाले लोगों के लिए।
- पोस्टर सुधारने वाले लोगों के लिए।
- कंधे का दर्द से परेशान लोग लोगों के लिए।
- एथलीट्स के लिए।
- फिजियो-रिकवरी प्रोग्राम के लिए।
अतिरिक्त सुझाव-
इस एक्सरसाइज को आप दैनिक गतिविधियों, जैसे-
- वार्म-अप में
- एक्टिवेशन सेट में
- रिकवरी डे में
अवश्य सम्मिलित करें, इससे रियर डेल्ट अधिक सक्रिय हो जाएगी और मुख्य व्यायाम अधिक प्रभावशाली बनेगा।
3. रियर डेल्ट स्क्वीज-

रियर डेल्ट स्क्वीज, एक बहुत ही आसान लेकिन अत्यंत प्रभावशाली बॉडीवेट एक्सरसाइज है, जो विशेष रूप से, रियर डेल्ट मसल्स को सक्रिय करने के लिए की जाती है। यह एक्सरसाइज जिम वर्कआउट से पहले वार्म-अप, घर पर होम वर्कआउट, और ऑफिस में पोश्चर करेक्शन ब्रेक के रूप में भी की जा सकती है।
अभ्यास की विधि-
इसके लिए सर्वप्रथम-
- सीधे खड़े हो जाएं।
- पैरों के बीच थोड़ा गैप रखें।
- दोनों हाथ साइड में फैलाएं।
- हथेलियां बाहर की ओर रखें।
- अब कंधों को पीछे की तरफ खींचें।
- जैसे दो चीजों को पीठ के पीछे दबा रहे हों।
- 3-5 सेकंड तक होल्ड करें।
- धीरे-धीरे रिलैक्स करें।
- दोहराएं।
सही फॉर्म-
इसके लिए-
- पीठ सीधी रखें।
- छाती हल्की बाहर रखें।
- गर्दन सामान्य स्थिति में रखें।
- सांस सामान्य रखें।
- कंधों को कानों की तरफ न उठाएं।
रेप्स और सेट-
- शुरुआती लोगों के लिए- 10-12 रेप्स × 3 सेट
- इंटरमीडिएट लोगों के लिए 12-15 रेप्स × 3-4 सेट
हर रेप में 3-5 सेकंड होल्ड
सामान्य गलतियां-
- गर्दन आगे निकालना।
- कमर में ज्यादा आर्च बनाना।
- कंधों को ऊपर उठाना।
- बहुत तेजी से मूवमेंट करना।
लाभ-
इसका नियमित अभ्यास करने पर-
- रियर डेल्ट सक्रियण।
- कंधे की हड्डी पर कंट्रोल।
- बॉडी पोस्चर में सुधार।
- जोड़ों के लिए अच्छे व्यायाम।
- चोट से बचाव।
- मस्तिष्क और मांसपेशियों के संबंध में मजबूती।
किसके लिए उपयुक्त-
- होम वर्कआउट करने वाले लोगों के लिए।
- शुरुआती जिम करने वाले लोगों के लिए।
- पोस्टर सुधारने वाले लोगों के लिए।
- कंधे का दर्द से परेशान लोग लोगों के लिए।
- होम वर्कआउट करने वाले लोगों के लिए।
- ऑफिस में लंबे समय तक बैठने वाले लोगों के लिए।
रियर डेल्ट एक्सरसाइज: निष्कर्ष-
रियर डेल्ट एक्सरसाइज, कंधों की रियर डेल्ट मांसपेशियों के लिए वे एक्सरसाइज हैं, जिन्हें प्रायः लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन मजबूत और हेल्दी शोल्डर के लिए इनकी भूमिका अत्यंत प्रभावशाली एवं महत्वपूर्ण होती है। यदि आप केवल फ्रंट और साइड डेल्ट पर एक्सरसाइज करते हैं और रियर डेल्ट एक्सरसाइज को छोड़ देते हैं, तो इससे शोल्डर असंतुलित, गलत पोस्चर, दर्द, और चोट का खतरा धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।
रियर डेल्ट एक्सरसाइज, कोई भारी वजन उठाने की रेस नहीं है, बल्कि यह सही फॉर्म, कंट्रोल और कंसिस्टेंसी का खेल है। अगर आप धीरे-धीरे, सही तरीके से और नियमित रूप से रियर डेल्ट एक्सरसाइज करते हैं, तो आपके कंधे न केवल मजबूत बनते हैं, बल्कि आपकी शरीर संतुलित, स्थिर और सुंदर दिखाई देने लगती है।
याद रखें, मजबूत रियर डेल्ट केवल सौंदर्य संबंधी लुक के लिए नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में बेहतर गतिविधियों, दर्द-मुक्त कंधे और फिटनेस के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। रियर डेल्ट एक्सरसाइज के नियमित अभ्यास और सही ट्रेनिंग के साथ, आप न केवल कंधों को मजबूत बना सकते हैं, बल्कि कंधे और पीठ का समग्र विकास में भी बेहतर परिणाम पा सकते हैं।
अतः आज ही से रियर डेल्ट एक्सरसाइज की शुरुआत करें।