बैकवर्ड एक्सरसाइज क्या है और यह सेहत के लिए इतनी फायदेमंद क्यों मानी जाती है? जानिए पीछे चलने वाली इस आसान लेकिन असरदार एक्सरसाइज के फायदे, सही तरीके, वजन घटाने में भूमिका, घुटनों के दर्द से राहत, दिमाग तेज करने के लाभ और इसे रोज़मर्रा की फिटनेस लाइफ में सुरक्षित तरीके से शामिल करने की पूरी जानकारी
बैकवर्ड एक्सरसाइज: भूमिका-
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वर्तमान समय की व्यस्त जीवनशैली में, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए तरह-तरह की एक्सरसाइज अपनाये जाते हैं। इसके लिए कोई जिम जाता है, कोई योग करता है, तो कोई प्रतिदिन वॉक या रनिंग को अपनी दैनिक जीवनशैली का अंग बनाता है। लेकिन विगत कुछ ही वर्षों में, एक विशेष प्रकार की एक्सरसाइज ने लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित किया है, जिसे बैकवर्ड एक्सरसाइज कहा जाता है। जैसा कि यह नाम से ही स्पष्ट है, कि इसमें आगे की बजाय पीछे की दिशा में चलना या गति करना सम्मिलित किया गया है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के पूर्ण संतुलन के लिए बैकवर्ड एक्सरसाइज, एक रोमांचक समाधान के रूप में प्रकट हुआ है।
बैकवर्ड एक्सरसाइज का अर्थ है, आगे की बजाय पीछे की दिशा में चलना या मूव करना। पहली बार सुनने पर ही, यह विचित्र लग सकती है, लेकिन जब इस एक्सरसाइज का सही ढंग से अभ्यास किया जाता है, तो यह शरीर और मस्तिष्क दोनों के लिए अत्यंत लाभदायक होता है। बैकवर्ड एक्सरसाइज में, आगे की बजाय पीछे की दिशा में चलने का उद्देश्य है, को हर एक कदम को इस तरह सोच-समझकर रखना, जिससे मांसपेशियों के साथ-साथ, शरीर और मस्तिष्क का संतुलन, फोकस, सतर्कता और सक्रियता बढ़ सके। सामान्य रूप से चलने या टहलने में, शरीर जिस ढांचे पर काम करता है, बैकवर्ड एक्सरसाइज में वही ढांचा पूरी तरह बदल जाता है।
बैकवर्ड एक्सरसाइज का अर्थ एवं परिभाषा-
बैकवर्ड एक्सरसाइज का अर्थ ऐसी शारीरिक गतिविधि से है, जिसमें व्यक्ति आगे के बजाय पीछे की ओर चलता है या गति करता है। जब कोई व्यक्ति सीधे खड़े होकर, पीछे की ओर धीरे-धीरे कदम बढ़ाता है और इसी दिशा में एक्सरसाइज भी करता है, तो उसे बैकवर्ड एक्सरसाइज कहा जाता है। बैकवर्ड एक्सरसाइज एक ऐसी फिटनेस तकनीक है, जिसमें शरीर को उसकी सामान्य प्रवृत्ति से हटकर, अलग दिशा में मूव कराया जाता है, जिससे मांसपेशियां, जोड़ और मस्तिष्क नए ढंग से सक्रिय हो सकें। इसमें पीछे चलना, हल्की दौड़, स्ट्रेचिंग जैसी गतिविधियां सम्मिलित हैं, लेकिन सभी पीछे की दिशा में अभ्यास की जाती हैं।
इस एक्सरसाइज का मुख्य उद्देश्य शरीर के संतुलन को बेहतर बनाना, मांसपेशियों को मजबूत करना और मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाना होता है। इसमें आगे चलने की तुलना में ध्यान देकर, हर कदम पर पीछे की ओर चलना पड़ता है, जिससे फोकस और कोऑर्डिनेशन बेहतर होता है। बैकवर्ड एक्सरसाइज पीछे चलकर सेहत सुधारने की एक आसान और प्रभावशाली विधि है, जिसे अत्यंत सावधानी और नियमित अभ्यास के साथ अपनाया जा सकता है।
आगे चलने की जगह पीछे की ओर चलना, क्यों अलग है
बैकवर्ड एक्सरसाइज में, व्यक्ति आगे चलने के बजाय पीछे की ओर धीरे-धीरे कदम बढ़ाता है, तो यह प्रक्रिया केवल पीछे की ओर चलने का ही नहीं, बल्कि शरीर को अलग ढंग से संतुलित करने, मांसपेशियों सक्रिय करने और मस्तिष्क को सतर्क रखने का भी होता है। जब हम आगे की ओर चलते हैं, तो हमारे पैर, घुटने और मांसपेशियां एक निर्धारित क्रम में काम करते हैं। लेकिन पीछे चलने के लिए हर कदम सोच-समझकर रखना पड़ता है। इससे बैलेंस, फोकस और कोऑर्डिनेशन बेहतर होता है। शरीर में कुछ मांसपेशियां ऐसी होती हैं, जो सामान्य रूप से चलने में कम, लेकिन बैकवर्ड एक्सरसाइज में अधिक एक्टिव रहती हैं।
आजकल फिटनेस के संदर्भ में, बैकवर्ड एक्सरसाइज की चर्चा इसलिए बढ़ रही है, क्योंकि इस समय अधिकांश लोग ऐसी एक्सरसाइज चाहते हैं, जो घुटनों पर कम दबाव डाले, मस्तिष्क को भी एक्टिव रखे । फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन में भी इसका उपयोग अधिक बढ़ा है। यह एक्सरसाइज विशेष रूप से, जो बुजुर्ग हैं या घुटनों के दर्द से परेशान हैं, लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, अपनी फिटनेस दिनचर्या में कुछ आसान और नया अभ्यास जोड़ना चाहते हैं, उन लोगों के लिए अत्यंत लाभदायक है। यदि सावधानी के साथ इसका अभ्यास किया की जाए, तो बैकवर्ड एक्सरसाइज हर उम्र के लोगों के लिए एक सुरक्षित और प्रभावशाली विकल्प बन सकती है।
शुरुआती लोगों के लिए बैकवर्ड एक्सरसाइज-
शुरुआती लोगों के लिए बैकवर्ड एक्सरसाइज को समझना और अपनाना बहुत आसान होता है। केवल सही दृष्टिकोण और धैर्य की आवश्यकता होती है। सबसे पहले यह समझें कि बैकवर्ड एक्सरसाइज, कोई जटिल या खतरनाक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह केवल उल्टा चलने का ही एक रूप है। शुरुआत में इसे केवल पीछे की ओर धीरे-धीरे चलना का अर्थ समझकर बैकवर्ड एक्सरसाइज का नियमित अभ्यास करें। किसी खुले और सुरक्षित स्थान पर खड़े होकर छोटे कदम पीछे की ओर बढ़ाएं। गति बहुत धीमी रखें और शरीर के संतुलन पर ध्यान दें। शुरुआत में दीवार, रेलिंग या किसी मजबूत सहारे रहना लाभदायक होता है।
शुरुआती लोगों के लिए यह भी आवश्यक है, कि इसे किसी प्रतियोगिता की तरह न लें। पहले दिन 5 मिनट पीछे चलना ही पर्याप्त है। जब शरीर इस नए मूवमेंट का शरीर की आदत हो जाए, तब समय और गति धीरे-धीरे बढ़ाएं। शुरुआती लोगों को यह समझना चाहिए कि इस एक्सरसाइज में मस्तिष्क और शरीर दोनों एक साथ कार्य करते हैं। हर कदम सोच-समझकर रखें, सांस सामान्य रखें और जल्दबाजी से बचें। इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि अपने शरीर की बात सुनें। अगर थकान, चक्कर या दर्द महसूस हो, तो तुरंत रुक जाएं। धीरे-धीरे अभ्यास से बैकवर्ड एक्सरसाइज सहज और लाभदायक प्रतीत होगी।
ब्लॉग का उद्देश्य-
इस ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य पाठकों को बैकवर्ड एक्सरसाइज के बारे में सही, आसान और विश्वसनीय जानकारी प्रदान करना है। इसके अतिरिक्त इस ब्लॉग में, बैकवर्ड एक्सरसाइज का अर्थ एवं परिभाषा, इसके प्रमुख कार्य, प्रमुख लाभ, इसके प्रकार, विभिन्न चरणों में अभ्यास करने की मार्गदर्शिका, अभ्यास करते समय सावधानियां, और इसको प्रभावशाली बनाने के विशेष सुझाव का वर्णन किया गया है। आज बहुत से लोग फिट रहने की चाह में, नई-नई एक्सरसाइज अपनाना चाहते हैं, लेकिन जानकारी की कमी के अभाव में, वे भ्रमित हो जाते हैं या गलत तरीका अपना लेते हैं। यह ब्लॉग उसी भ्रम को दूर करने के लिए लिखा गया है।
इस ब्लॉग में, पाठकों को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि बैकवर्ड एक्सरसाइज, किन लोगों को नहीं करनी चाहिए? ब्लॉग का उद्देश्य, फिटनेस को जटिल बनाने के बजाय सरल और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करना है, जिससे हर उम्र और हर वर्ग का व्यक्ति, बिना डर और झिझक के सकारात्मक कदम बढ़ा सके।
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बैकवर्ड एक्सरसाइज के प्रमुख कार्य-
बैकवर्ड एक्सरसाइज, मस्तिष्क और मांसपेशियों का सामंजस्य स्थापित करना, बैलेंस और कोऑर्डिनेशन पर प्रभाव डालने, कैलोरी बर्न करने और मांसपेशियों की सक्रियता बढ़ाने का कार्य करती है।
1. शारीरिक गतिविधियों का नया पैटर्न-
बैकवर्ड एक्सरसाइज, शरीर को उसकी प्रतिदिन की आदत से अलग हटकर, पीछे की ओर चलने के लिए प्रेरित करती है। इसी कारण इसमें शरीर के मूवमेंट का एक नया पैटर्न बनता है। इससे पूरा मस्कुलर सिस्टम अधिक सतर्क और सक्रिय हो जाता है।
2. मस्तिष्क और मांसपेशियों का सामंजस्य-
इस एक्सरसाइज में मस्तिष्क और मांसपेशियों का सामंजस्य बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पीछे चलते समय आंखें, लेकिन विपरीत दिशा में होती है, इसलिए मस्तिष्क को अधिक ध्यान लगाना पड़ता है। इसमें मस्तिष्क, लगातार मांसपेशियों को सही निर्देश देता है, जिससे न्यूरो-मस्कुलर कनेक्शन मजबूत होता है और फोकस भी बढ़ जाता है।
3. बैलेंस और कोऑर्डिनेशन पर प्रभाव-
इस बैकवर्ड एक्सरसाइज का सीधा प्रभाव, बैलेंस और कोऑर्डिनेशन पर पड़ता है। पीछे की ओर चलते समय शरीर का संतुलन बनाए रखना थोड़ा चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन नियमित अभ्यास से शरीर, स्वयं को संतुलित करना सीख जाता है, जिससे गिरने का डर कम हो जाता है और स्टेबिलिटी बढ़ जाती है।
4. कैलोरी बर्न करनेकी अलग विधि-
बैकवर्ड एक्सरसाइज में कैलोरी बर्न का ढंग भी अलग होता है। शरीर को अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे कम समय में भी अधिक ऊर्जा खर्च होती है।
5. मांसपेशियों की सक्रियतामें वृद्धि-
बैकवर्ड एक्सरसाइज में, मांसपेशियों की सक्रियता में वृद्धि होती है, क्योंकि सामान्य वॉकिंग की तुलना में, सभी मांसपेशियां इसमें अधिक कार्य करती हैं। यही कारण है, कि यह एक्सरसाइज अधिक प्रभावशाली मानी जाती है।
बैकवर्ड एक्सरसाइज के प्रमुख लाभ-
बैकवर्ड एक्सरसाइज, पूरे शरीर और मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। नियमित रूप से इसका अभ्यास करने पर कई ऐसे लाभ मिलते हैं, जो सामान्य एक्सरसाइज में कम देखने को मिलते हैं।
1. वजन घटाने में मदद-
बैकवर्ड एक्सरसाइज वजन घटाने में अधिक प्रभावशाली मानी जाती है क्योंकि इसमें शरीर को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। पीछे चलने पर मांसपेशियां सामान्य से अधिक सक्रिय होती हैं, जिससे फैट बर्न की प्रक्रिया तेज हो जाती है। यह एक्सरसाइज शरीर की ऊर्जा खपत बढ़ाती है, जिससे कैलोरी जल्दी खर्च होती है। इसके साथ ही, बैकवर्ड एक्सरसाइज मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाती है, जिससे शरीर वजन घटाने में मदद मिलती है।
2. घुटनों के दर्द में राहत-
जो लोग घुटनों के दर्द से परेशान रहते हैं, उनके लिए यह एक्सरसाइज अत्यंत लाभदायक हो सकती है। पीछे चलने से घुटनों पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाता है। इसी कारण फिजियोथेरेपी में भी बैकवर्ड वॉकिंग का अधिक उपयोग किया जाता है। यह घुटनों के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करती है और दर्द को धीरे-धीरे कम करने में मदद करती है।
3. मस्तिष्क की तीव्रता में सहायक-
बैकवर्ड एक्सरसाइज करते समय मस्तिष्क को अधिक तीव्र व सतर्क रहना पड़ता है। इससे फोकस और एकाग्रता बेहतर हो जाता है। इसके लगातार अभ्यास से, मस्तिष्क की गतिविधियों में सुधार देखा जाता है, जिससे याददाश्त और निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत हो जाती है।
4. संतुलन और स्थिरता में वृद्धि-
इसमें पीछे चलते समय शरीर को संतुलन बनाए रखना सीखना पड़ता है। इससे गिरने का डर कम होता है और स्थिरता बढ़ जाती है। यही कारण है, कि यह एक्सरसाइज, बुजुर्गों के लिए भी अत्यंत लाभदायक मानी जाती है, क्योंकि इससे उनका संतुलन बेहतर होता है।
5. हृदय के स्वास्थ्य में लाभदायक-
बैकवर्ड एक्सरसाइज को एक नया कार्डियो एक्सरसाइज माना जाता है। यह दिल की धड़कन को नियंत्रित ढंग से बढ़ाती है, जिससे हृदय का स्वास्थ्य बेहतर होता है।
बैकवर्ड एक्सरसाइज के प्रकार-
बैकवर्ड एक्सरसाइज के अभ्यास को अलग-अलग प्रकार से किया जा सकता है। व्यक्ति अपनी उम्र, फिटनेस लेवल और आवश्यकता के अनुसार, इसे चुन सकता है।
1. बैकवर्ड वॉकिंग-

बैकवर्ड वॉकिंग, बैकवर्ड एक्सरसाइज का सबसे आसान और सुरक्षित रूप माना जाता है। इसमें व्यक्ति सीधे खड़े होकर धीरे-धीरे पीछे की ओर चलता है। इस एक्सरसाइज को पार्क या खुले मैदान में बैकवर्ड वॉकिंग करना सबसे बेहतर होता है, क्योंकि यहां खुली जगह होती है और टकराने या गिरने का कम खतरा रहता है। समतल जमीन पर चलने से, बैलेंस बनाए रखना भी आसान होता है। शुरुआत में किसी दीवार या रेलिंग के पास चलना सुरक्षित रहता है।
ट्रेडमिल पर बैकवर्ड वॉकिंग करते समय अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता होती है। पहले ट्रेडमिल की स्पीड बहुत कम रखें, हैंडल को पकड़कर चलें और अचानक गति न बढ़ाएं। यह विधि, उन लोगों के लिए अच्छा है, जो मौसम या जगह की वजह से बाहर नहीं जा पाते।
2. बैकवर्ड रनिंग-

बैकवर्ड रनिंग एक्सरसाइज, थोड़ा एडवांस लेवल की एक्सरसाइज है। इसमें पीछे की ओर हल्की दौड़ लगाई जाती है। यह एक्सरसाइज, उन लोगों को करनी चाहिए जिनका बैलेंस अच्छा हो, जो पहले से नियमित वॉक या रनिंग करते हों और जिनके घुटनों में कोई भी गंभीर समस्या न हो। यह एक्सरसाइज, कितनी देर सुरक्षित है, यह व्यक्ति की क्षमता पर निर्भर करता है। शुरुआत में 20–30 सेकंड काफी होते हैं। धीरे-धीरे समय बढ़ाया जा सकता है। लंबे समय तक लगातार बैकवर्ड रनिंग करने से थकान या चोट का खतरा हो सकता है, इसलिए बीच-बीच में आराम या सावधानी की आवश्यकता होती है।
3. बैकवर्ड स्टेप्स एक्सरसाइज-

इस एक्सरसाइज में, सीढ़ियों या स्टेप्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें व्यक्ति नीचे से ऊपर या ऊपर से नीचे की ओर, पीछे की दिशा में स्टेप्स लेता है। सीढ़ियों पर सावधानी की अधिक आवश्यकता है। हमेशा रेलिंग पकड़कर रखें और बहुत धीमी गति से यह अभ्यास करें। फिसलन वाली सीढ़ियों पर यह एक्सरसाइज न करें। यह एक कम प्रभावशाली विकल्प माना जाता है, क्योंकि इसमें कूद या अधिक तेज गतिविधियां नहीं होती है। इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और घुटनों पर अधिक दबाव भी नहीं पड़ता है।
4. बैकवर्ड स्ट्रेचिंग-

बैकवर्ड स्ट्रेचिंग का अर्थ, ऐसी स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज से है, जिसमें शरीर को पीछे की दिशा में मोड़ा या खींचा जाता है। यह मांसपेशियों की लचीलापन को बढ़ाने में मदद करती है और शरीर को अधिक लचीला बनाती है। बैकवर्ड स्ट्रेचिंग को वॉर्म-अप और कूल-डाउन दोनों में सम्मिलित किया जा सकता है। एक्सरसाइज शुरू करने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग, मांसपेशियों को तैयार करती है और अंत में करने से थकान कम होती है।
अतः इन सभी प्रकार के बैकवर्ड एक्सरसाइज में से सही विकल्प चुनकर, इसे सुरक्षित और असरदार बनाया जा सकता है।
विभिन्न चरणों में बैकवर्ड एक्सरसाइज का अभ्यास करने की मार्गदर्शिका-
बैकवर्ड एक्सरसाइज से पूरा फायदा पाने के लिए इसे सही तरीके और सही क्रम में करना बहुत जरूरी है। नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके कोई भी व्यक्ति इसे सुरक्षित रूप से कर सकता है।
1. सही जगह का चुनाव-
सबसे पहले सही जगह का चुनाव करें। इसके लिए ऐसी जगह चुनें, जहां फिसलन न हो और आसपास कोई रुकावट न हो। बैकवर्ड एक्सरसाइज सदैव समतल और साफ जगह पर करनी चाहिए। जैसे- पार्क, खुला मैदान या घर का खाली आंगन इसके लिए अच्छा विकल्प है।
2. सही जूते पहनना आवश्यकता-
इसके लिए सही जूते पहनना भी आवश्यक है। अच्छी ग्रिप वाले, आरामदायक जूते, पैरों को सपोर्ट करते हैं, जिससे फिसलने का खतरा कम हो जाता है। नंगे पैर या ढीले सैंडल पहनकर यह एक्सरसाइज करने से चोट लग सकती है।
3. शुरुआत धीमी गति से-
बैकवर्ड एक्सरसाइज का अभ्यास करने की शुरुआत, सदैव धीमी गति से करें। इसके लिए पहले छोटे-छोटे कदम पीछे की ओर बढ़ाएं। शरीर को नई गतिविधि की आदत डालने के लिए समय दें। जब संतुलन बेहतर हो जाए, तभी गति बढ़ाएं।
4. आंखों और गर्दन की स्थिति-
इसके लिए आंखों और गर्दन की पोजीशन सही रखें। आंखें सामने रखें और गर्दन को अधिक पीछे न मोड़ें। समय-समय पर, हल्का सा पीछे देख लें कि रास्ता साफ है या नहीं, इसकी जांच अवश्य कर लें।
5. सांस लेने की सही विधि-
इसके लिए सांस लेने की सही विधि अपनाएं। नाक से गहरी सांस लें और मुंह से धीरे-धीरे छोड़ें। सांस रोककर एक्सरसाइज न करें।
6. अभ्यास की अवधि-
बैकवर्ड एक्सरसाइज का अभ्यास करने की अवधि, शरीर की क्षमता के अनुसार ही समय को निर्धारित करें। इसके लिए शुरुआत में प्रतिदिन 5 से 10 मिनट काफी होते हैं। बाद में इसे 15–20 मिनट तक बढ़ाया जा सकता है।
बैकवर्ड एक्सरसाइज का अभ्यास करते समय सावधानियां-
बैकवर्ड एक्सरसाइज जितनी फायदेमंद है, उतनी ही इसमें सावधानी रखना भी जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही चोट का कारण बन सकती है, इसलिए नीचे दी गई बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- इसके लिए सदैव फिसलन वाली जगह से बचें। जैसे- गीली जमीन, चिकनी फर्श या ढलान वाली जगह पर पीछे चलने से गिरने का खतरा बढ़ जाता है। एक्सरसाइज का अभ्यास करने के लिए सदैव सूखी और समतल सतह चुनें।
- अकेले करते समय, विशेष ध्यान रखें। यदि आप अकेले बैकवर्ड एक्सरसाइज कर रहे हैं, तो किसी दीवार, रेलिंग या सपोर्ट के पास रहें। इसके लिए शुरुआत में किसी परिवार के सदस्य को पास रखना भी सुरक्षित रहता है।
- एक्सरसाइज का अभ्यास, सड़क पर करने से बचें। क्योंकि सड़क पर वाहन, लोग और अन्य रुकावटें होती हैं, जो पीछे चलते समय दिखाई नहीं देतीं। इसलिए सड़क पर बैकवर्ड एक्सरसाइज करना खतरनाक हो सकता है और इससे बचना ही बेहतर है।
- एक्सरसाइज का अभ्यास तेज गति से करने के नुकसान भी हो सकते हैं। अचानक तेज गति से पीछे चलने या दौड़ने से मांसपेशियों में खिंचाव, चक्कर या गिरने का डर रहता है। सदैव अपनी क्षमता के अनुसार ही गति रखें।
- यदि एक्सरसाइज करते समय चक्कर आए, तेज दर्द हो, सांस फूलने लगे या शरीर संतुलन का बिगड़ने लगे, तो तुरंत रुक जाना चाहिए। यदि इसके लिए आवश्यकता पड़े तो डॉक्टर से सलाह लेना भी आवश्यक है।
किन लोगों को बैकवर्ड एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए?
यद्यपि बैकवर्ड एक्सरसाइज कई लोगों के लिए अत्यंत लाभदायक होता है। लेकिन कुछ स्थितियों में, इसका अभ्यास करना कुछ लोगों के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता है। जैसे-
1. घुटने की गंभीर चोट-
जिन लोगों को गंभीर घुटने की चोट है या जिनके लिगामेंट कमजोर हैं, उन्हें यह एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसमें पीछे चलने से चोट बढ़ सकती है।
2. चक्कर आने की समस्या-
चक्कर आने या बार-बार संतुलन बिगड़ने पर भी, यह एक्सरसाइज खतरनाक हो सकती है। क्योंकि इसमें पीछे चलते समय दिशा का संज्ञान न होने से, गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
3. आंखों की कमजोरी-
जिन लोगों को यदि आंखों की कमजोरी या देखने में समस्या होती है, उन्हें भी सावधान रहना चाहिए, क्योंकि रास्ता ठीक से दिखाई न देने पर चोट लग सकती है।
4. हाल ही में सर्जरी होने पर-
यदि किसी व्यक्ति की हाल ही में घुटने, कमर या टखने की सर्जरी हुई हो, तो बिना डॉक्टर की अनुमति के, बैकवर्ड एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए।
यद्यपि इन सभी स्थितियों में, डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेना आवश्यक हो जाता है, जिससे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचने से बचाया जा सके।
बैकवर्ड एक्सरसाइज को प्रभावशाली बनाने के विशेष सुझाव-
बैकवर्ड एक्सरसाइज को प्रभावशाली बनाने और दीर्घकालिक लाभ के लिए कुछ विशेषज्ञों के सुझाव को अपनाना, अत्यंत लाभदायक होता है। ये सभी छोटे-छोटे प्रयास, अभ्यास को अधिक सुरक्षित और प्रभावशाली बनाते हैं।
1. समय का सही चुनाव-
इसके लिए सबसे पहली समय का सही चुनाव करना, अत्यंत आवश्यक है। सुबह का समय बैकवर्ड एक्सरसाइज के लिए सही माना जाता है, क्योंकि शरीर और मस्तिष्क अधिक ध्यान केंद्रित होता है। यदि सुबह संभव न हो, तो शाम को हल्का भोजन करने के बाद भी इसे किया जा सकता है।
2. म्यूजिक या माइंडफुलनेस-
इसके लिए म्यूजिक या माइंडफुलनेस का सहारा लेना भी लाभदायक होता है। हल्का म्यूजिक मन को शांत रखता है और एक्सरसाइज को बोझ नहीं बनने देता है। वहीं, माइंडफुलनेस के साथ एक्सरसाइज करने से हर कदम पर ध्यान बना रहता है, जिससे संतुलन और फोकस बेहतर होता है।
3. डाइट के साथ सामंजस्य-
इसके लिए डाइट के साथ सामंजस्य स्थापित करना भी अत्यंत आवश्यक है। बैकवर्ड एक्सरसाइज तभी प्रभावशाली होता है, जब शरीर को सही पोषण मिले। प्रोटीन, फल, सब्जियां और पर्याप्त पानी शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं और मांसपेशियों की रिकवरी में मदद करते हैं।
4. नियमित अभ्यास की आदत-
नियमित अभ्यास की आदत भी अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए प्रतिदिन बैकवर्ड एक्सरसाइज का नियमित अभ्यास करना, शरीर और मस्तिष्क के लिए अधिक लाभदायक होता है।
निष्कर्ष-
बैकवर्ड एक्सरसाइज, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक सरल लेकिन बेहद प्रभावशाली अभ्यास की पद्धति है। बैकवर्ड एक्सरसाइज का प्रमुख सार यही है कि यह शरीर को एक नए और अलग तरीके से सक्रिय करने का सरल उपाय है। पीछे की ओर चलने करने से न केवल मांसपेशियां मजबूत होती हैं, बल्कि मस्तिष्क के लिए संतुलन और एकाग्रता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह एक्सरसाइज आज फिटनेस और फिजियोथेरेपी दोनों क्षेत्रों में भी अधिक लोकप्रिय हो रही है। यही कारण है, कि आज इसे फिटनेस का एक प्रभावशाली विकल्प माना जा रहा है।
बैकवर्ड एक्सरसाइज को अपने दैनिक जीवन शैली में फिटनेस रूटीन में सम्मिलित करना इसलिए आवश्यक है, क्योंकि यह घुटनों पर कम दबाव डालती है, वजन घटाने में मदद करती है और हृदय के स्वास्थ्य में भी अधिक लाभ प्रदान करती है। नियमित अभ्यास से ही, इसके वास्तविक लाभ देखने को मिलते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इसका अभ्यास करने के लिए, किसी विशेष उपकरण या जिम की आवश्यकता नहीं होती। यह उन लोगों के लिए विशेष है, जो अपने दैनिक जीवन शैली में प्रतिदिन की एक्सरसाइज में कुछ नया और आसान अभ्यास जोड़ना चाहते हैं।
बैकवर्ड एक्सरसाइज के अभ्यास की शुरुआत सदैव, धीरे-धीरे और सावधानी से करनी चाहिए। शारीरिक क्षमता के अनुसार, कम समय से शुरुआत करना और धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाना ही सबसे अधिक प्रभावशाली विधि है। इसे हर उम्र और हर वर्ग का व्यक्ति सावधानी के साथ अपनाते हुए इसका लाभ उठा सकता है।